इस कहानी का किसी भी स्थान या व्यक्ति से कोई संबंध नही है!रूहानी पूरी तरह से काल्पनिक कहानी है!

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि नितिन,स्वाति,तनु और रॉकी का सामना रूहानी से होता है और वो सिर्फ नितिन की जान लेने को कहती है!अब आगे-

वो चारों गाड़ी में बैठ जाते हैं और रूहानी गुस्से में चिल्लाती है मैं इस लड़के को नही छोडूंगी!नितिन गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश करता है लेकिन रूहानी गाड़ी की छत पे चढ़ी लगातार गाड़ी को जोर-जोर से लात मारके गाड़ी को हिलाए जा रही है!नितिन काफी कोशिश करके गाड़ी को स्टार्ट करता है!रॉकी को स्वाति भोलेनाथ की भस्म देती है जो मन्दिर के पुजारी ने उन्हें दी थी!वो भस्म लेकर बाहर आता है और एक ही झटके में सारी भस्म रूहानी पे छिड़क देता है जिससे वो तड़प कर गायब हो जाती है!अब वो जल्दी से गाड़ी में बैठता है फिर वो चारों गाड़ी में बैठकर मन्दिर की ओर चलते हैं!कमाल की बात ये कि उस जंगल से बाहर आके उनकी गाड़ी भी अपनेआप ठीक हो जाती है!वो चारों मन्दिर पहुँच जाते हैं!तब तक तनु को भी होश आ जाता है और चारों मन्दिर के अंदर जाते हैं जहाँ पुजारी उन चारों का इंतजार कर रहा है!वो पुजारी को सारी बात बताते हैं कि तभी रॉकी पुजारी से कहता है कि बाबा उस चुड़ैल का अंत हम सबने कर दिया है!आपने जो भस्म दी थी वो मैंने उसके ऊपर छिड़क दी जिससे वो तड़प कर गायब हो गई है!

तभी पुजारी बोलते हैं कि अगर भस्म छिड़कने से ही उसका अंत होता तो मैं कबका कर चुका होता!

रॉकी हैरानी से पूछता है क्या मतलब है आपका बाबा?आप क्या कहना चाहते हैं कि चुड़ैल का अंत नही हुआ अभी?

हाँ,यही कह रहा हूँ मैं!पुजारी बोलता है!वो चुड़ैल इस भस्म से नष्ट नही हो सकती!उसकी शक्तियां समय के साथ बढ़ती ही जा रही है!वो इस भस्म से सिर्फ कुछ समय के लिए गायब हुई है!

तभी स्वाति देखती है कि नितिन खामोश सा एक तरफ खड़ा है!स्वाति उसके पास जाती है और पूछती है क्या हुआ नितिन तुम इतने खामोश क्यो हो?

नितिन चुप रहता है और वहाँ से जाने लगता है कि तभी स्वाति उसका हाथ पकड़ के रोक लेती है!स्वाति नितिन से कहती है कि नितिन प्लीज मुझे बताओ क्या हुआ तुम्हे?क्यों इतने खामोश हो?तभी वहाँ रॉकी और तनु भी आ जाते हैं!

तभी नितिन कहता है पता नही उस चुड़ैल का मुझसे क्या रिश्ता है?मुझे देखने के बाद उसकी आँखों से जो खून के आँसू बह रहे थे वो यूँ ही नही थे!मुझे उसमें बहुत दर्द छुपा दिखा!ऐसा लग रहा था जैसे किसीने उसे बहुत दर्द दिया हो!बस स्वाति मैं इसी बारे में सोच रहा था!

उसकी बात सुनकर स्वाति सोच में पड़ जाती है और कहती है नितिन तुम बिल्कुल सही कह रहे हो!लेकिन मुझे एक बात समझ नही आई,वो तुमसे किस बात का बदला लेना चाहती है!तुमने ऐसा क्या किया है जो वो तुम्हारे पीछे पड़ी है!

नितिन कहता है ये तो मैं खुद भी नही जानता!मैं तो यहाँ आया भी पहली बार हूँ!क्या तुम मुझपे शक कर रही हो स्वाति?

नही नितिन मैं तुमपर कभी शक नही कर सकती हूँ!स्वाति कहती है!तभी रॉकी आगे आता है यार तूने ये कैसे सोच लिया कि हम में से कोई भी तुझ पर शक कर सकता है!ये कहकर रॉकी नितिन को गले लगा लेता है!स्वाति और तनु भी देख रही हैं उन दोनों की दोस्ती!

अब नितिन कहता है कि मैंने एक फैसला लिया है!रॉकी पूछता है कैसा फैसला?

नितिन कहता है कि कल रात मैं अकेला रूहानी से मिलने जाऊंगा और उससे पूछूंगा कि वो मुझे क्यों मारना चाहती है और अगर मेरे मरने से उसे मुक्ति मिलती हो तो मैं इसके लिए भी तैयार हूँ!

तभी स्वाति गुस्से में बोलती है ये क्या कह रहे हो तुम?मैं तुम्हे ऐसा कुछ नही करने दूँगी!हम एक साथ आये थे और जो करेंगे साथ ही करेंगे!

तभी नितिन कहता है कि नही मैं रूहानी से जानकर ही रहूँगा कि वो ये सब क्यों कर रही हैं,चाहे फिर जो भी हो!तुम सबको भी मेरी कसम है तुम मुझे कल रात को वहाँ जाने से नही रोकोगे!मैं अब ये जानना चाहता हूँ कि उसका मुझसे क्या रिश्ता है और ये मैं किसी ओर के लिए नही खुद के लिए करना चाहता हूँ!ये कहकर नितिन वहाँ से चला जाता है!रात का समय है नितिन मन्दिर के आँगन में अकेला खड़ा है कि तभी वहाँ स्वाति आती है!वो नितिन से पूछती है कि नितिन तुम क्यो अपनी जान खतरे में डालना चाहते हो?

नितिन जवाब देता है मैंने रूहानी की आँखों मे एक दर्द देखा है और मैं उस दर्द की वजह जानकर ही रहूँगा!

लेकिन मैं नही चाहती कि तुम अपनी जान खतरे में डालो,स्वाति कहती है!

नितिन उसे कहता है कि क्यों तुम्हें इस बात से क्या फर्क पड़ता है?

स्वाति उसे कहती है कि जब हमने ये सफर शुरू किया था तो हम इतने अच्छे दोस्त नही थे लेकिन तुम मानो या ना मानो लेकिन मैं तो तुम्हे अपना दोस्त मानने लगी हूँ!

नितिन उसकी बात से मुस्कुराने लगता है और जब स्वाति वहाँ से जाने लगती है तो उसका हाथ पकड़के रोक लेता है!स्वाति और नितिन वहाँ बातें करने में इस कदर खो जाते हैं कि उन्हें पता ही नही चलता कब सुबह हो जाती है!




दूसरी तरफ रॉकी को अपने दोस्त नितिन की चिंता सता रही है,वो सुबह होते ही नितिन के पापा को फोन करता है और उन्हें सारी बात बता देता है!नितिन के माँबाप को जब सारी बात का पता चलता है तो वो दोनों गाड़ी निकाल के तभी नैनीताल की ओर चल पड़ते हैं!

दूसरी तरफ स्वाति अपने पिताजी को फोन पे सारी बात बताती है और वो उसे नितिन का साथ देने को कहते हैं!वो कहते हैं बेटी मैंने आजतक तुझे जितनी भी विद्या सिखाई है  उसका इम्तिहान देने का समय आ गया है!तुम नितिन की रक्षा करोगी इस बात का मुझे पूरा भरोसा है!

धीरे धीरे दिन बीत चुका है और फिर से एक ओर भयानक रात आने वाली है!पुजारी को जब नितिन के फैसले का पता चलता है तो वो उसे आशीर्वाद देते हैं और कहते हैं भोलेनाथ तुम्हारी रक्षा करेंगे!

अब रात हो चुकी है और नितिन ज्यों ही मन्दिर से अकेले जंगल जाने के लिए निकलने लगता है तभी स्वाति उसका हाथ पकड़ लेती है और कहती है नितिन मैं तुम्हे अकेले नही जाने दूँगी!मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगी!

नितिन देखता है कि स्वाति की आँखों में जिद और आत्मविश्वास भरा है,वो चाह कर भी उसे मना नही कर पाता!अब नितिन और स्वाति फिर से निकल पड़ते हैं रूहानी की ओर!

दोनों खामोशी से गाड़ी में बैठे हैं,नितिन स्वाति से पूछता है कि तुमने मुझे अकेले क्यों नही जाने दिया!

स्वाति भी कहती है क्योंकि वहाँ मेरी नही तुम्हारी जान को खतरा है इसीलिए नही जाने दिया!

नितिन फिर कहता है यही बात है या कुछ ओर?

मतलब?स्वाति पूछती है!

कुछ नही फिर बताऊंगा!अब वो थोड़ी देरी में ही जंगल पहुँच जाते हैं!

रूहानी क्यों नितिन को मारना चाहती है,जानने के लिए देखिए अगला भाग!
हर हर महादेव
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