जीवन को अमृत से भरना निशदिन हम सत्संग कराएं.
काम ।क्रोध  मद  लोभ को छोड़े।
जीवन यात्रा विमल बनाएं।
अमृत की चाहत जो रखें विषयों को ना गले लगाएं
जीवन छोटा प्रेम भरा हो प्रकृति से निशदिन  प्रेम बढ़ाएं ।
अमृतधारा बहे जीवन में सुरभित कण कण ही हो जाए।।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त 


डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर