स्वाति को बेहोशी की हालत में हास्पिटल ले जाया गया । जहां डाक्टरों ने बहुत से जांच कर के स्वाति को दो दिन के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया । क्योंकि खून ज्यादा बहने के कारण स्वाति खतरे में थी । 
डाक्टर - इनके पति कहां है और ये चोट इन्हें कैसे लगी ? देखिए अंकल मैं आपको बहुत पहले से जानता हूं । लेकिन आज भाभी जी की हालत देखकर लग रहा है । जैसे इन्हें बहुत मारा गया है । जोकि बिल्कुल ग़लत है और वो भी इस हालत में जब वो मां बनने वाली हैं । ये कानूनन अपराध है । ये बात तो आप भी जानते हैं । मैंने पुलिस को अभी तक कुछ नहीं बताया है । लेकिन मैं स्वाति की ओर से कुछ नहीं कह सकता । जब उन्हें होश आ जायेगा । तब वो राजेश के खिलाफ कार्रवाई करेंगी की नहीं , मैं नहीं कह सकता । गोपाल प्रसाद जी ने कहा - इतनी गिरी हुई हरकत करने वाले को पुलिस के हवाले कर देना चाहिए । चाहे वो मेरा बेटा ही क्यूं ना हो । सभी घर वाले स्वाति के होश में आने का इंतजार करने लगे । गोपाल प्रसाद जी ने अपनी पत्नी के खिलाफ जाकर अपने बेटे के खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई । अब पुलिस वालों को भी स्वाति के होश में आने का इंतजार था । उन्हें भी स्वाति का बयान लेना था । स्वाति को पूरे पांच घंटे बाद होश आया । होश में आने पर पुलिस वाले सबसे पहले स्वाति से मिलने गए । आधे घण्टे बाद पुलिस वाले कमरें से बाहर बड़बड़ाते हुए निकले । इन्हीं लोगों की वजह से अपराधी छूट जाते हैं । जब बयान देने की बारी आई तो झूठ कह रहे हैं । कल को कुछ हो गया तो यही लोग पुलिस वालों को बदनाम करेंगे । खाली - पीली टाइम बर्बाद कर दिया । तभी इंस्पेक्टर के पास फोन आता है कि , घड़ी चौक के पास जबरदस्त एक्सिडेंट हुआ है । खड़ी कार को एक अनियंत्रित ट्रक ने कुचल दिया। उसमें बैठे एक लड़की और एक शख्स की तत्काल मौके पर ही मौत हो गई है । खबर मिलते ही इंस्पेक्टर घटना स्थल के लिए रवाना हो गए । पुलिस के जाते ही स्वाति के माता-पिता अस्पताल आते हैं । स्वाति की हालत देखकर वो अपने आप को रोक नहीं पाते और रो पड़ते हैं । स्वाति भी भरे आंखों से अपने मां - पापा को देखती है ।  स्वाति की मां स्वाति की सूनी मांग और गले को देखकर रो पड़ती है । तभी गोपाल प्रसाद जी को एक फोन आता है । जिसे सुनकर उनके हाथ से उनकी छड़ी छूट जाती है और वो खुद गिरने लगते हैं । लेकिन समय रहते उन्हें स्वाति के पापा ने सहारा देकर उन्हें गिरने से बचा लेते हैं । उनके हाथ से मोबाइल छूट कर जमीन पर गिर पड़ती है । जिसे स्वाति के पापा उठा कर खुद बात करने लगते हैं । 
हैलो ... आप सुन रहे हैं ना सर ? आप जल्दी से सिटी हास्पिटल पहुंचे और लाश की शिनाख्त करें तभी आगे की कार्रवाई की जाएगी । ये बोल कर उधर से फोन कट गया । 
जिस कार का एक्सिडेंट हुआ था वो कार राजेश की थी । उसका आई डी कार्ड और उसके साथ रिचा का आई कार्ड के जरिए पहचान हुई । 
गोपाल प्रसाद जी के घर में कोहराम मच गया । सरला देवी और उनकी बेटी प्रीति बार बार बेहोश हो जाती । गोपाल प्रसाद जी ने किसी तरह अपने आप को संभाले रखा था । स्वाति तो बिल्कुल चुप थी । किसी बुत की तरह  , जब राजेश के पार्थिव शरीर को ले जाया जा रहा था । तो सभी की आंखों में आंसू थे सिवाय स्वाति को छोड़कर । स्वाति को देखकर आस-पास की महिलाओं ने खुसर फुसर शुरू कर दी । सरला काकी के तो भाग्य ही फुट गये । कैसी कुलक्षिणी बहु लाई है । साल भर भी नहीं हुए शादी को और अपने पति को खा गई । देखो तो महारानी को मजाल है जो आंखों से एक बुंद आंसू भी निकला हो ! कैसी औरत है राम - राम तभी एक जागरूक महिला ने कहा - सुना है सरला की बहू मां बनने वाली हैं ! क्या बात कर रही हो ! तभी एक और सभ्य समाज की जागरूक महिला ने कहा ! सच कह रही हूं बहन , इस बच्चे ने तो जन्म से पहले ही अपने को खा लिया । पहली महिला ने कहा ! स्वाति को अपने जगह से उठते देख सभी महिलाएं चुप हो गई और फ़िर से सिसकने लगी । सृवाति चुपचाप अपने कमरे में चली गई और कमरें में जाकर बाथरूम में शावर चालू कर उसके नीचे खड़ी हो गई । भरभरा कर रोने लगी । करीब एक घंटे तक वो रोते रही । अपने कुछ महीनों की कड़वी यादें वो पानी के साथझ बहा देना चाहती थी । राजेश के तेरहवीं के दिन उसकी सास और ननद ने सबकी बातों में आकर स्वाति का बहुत अपमान किया । स्वाति का अपमान उसके माता-पिता नहीं देख सके और स्वाति को लेकर अपने घर आ गये । धीरे - धीरे समय बीत रहा था ‌। और देखते-देखते नौ महीने पूरे हो गये । स्वाति ने एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया । जिसका नाम स्वाति ने शिवांश रखा ।


क्रमशः