पंछी को कहां ठिकाना है
पंख फैलाए नील गगन में
बस उड़ते ही जाना है
बस उड़ते ही जाना है।।
कभी उड़ा तिनके की तलाश में
तिनका तिनका चुन
प्यार का घरोंदा सजाने की चाह में
कभी उड़ा भोजन की आश में
दाना दाना चुग
अपनों की भूख मिटाने की जिद में
पंछी को कहां ठिकाना है
पंख फैलाए नील गगन में
बस उड़ते ही जाना है
बस उड़ते ही जाना है।।
उड़ कर नई उमंग नए जोशो-खरोश में
सीमाओं के बंधन तोड़
दूर देश तक मैं उड़ता ही रहा उड़ता ही रहा
उड़ कर दूनिया भर लूं आगोश में
हवाओं का रुख मोड़
तूफ़ानों से हरदम मैं लड़ता ही रहा लड़ता ही रहा
उड़ कर चूम लूं सारा आकाश होशो-हवास में
जीत ना पाऊं का भ्रम तोड़
नई ऊंचाइयों को पल पल मैं छूता ही रहा छूता ही रहा
उड़ कर नया कर गुजरने के विश्वास में
पुरानी पगडंडियों की राह छोड़
शिखर पर परचम लहरा मैं कहता ही रहा कहता ही रहा
पंछी को कहां ठिकाना है
पंख फैलाए नील गगन में
बस उड़ते ही जाना है
बस उड़ते ही जाना है।।
थकना रूकना नहीं सीखा मैंने
मिलों लम्बा हो चाहे जीवन का सफर
डरकर पीछे मुड़ना नहीं सीखा मैंने
आंधी तूफान भरी हो चाहे जीवन की डगर
पंछी को कहां ठिकाना है
पंख फैलाए नील गगन में
बस उड़ते ही जाना है
बस उड़ते ही जाना है।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐

0 टिप्पणियाँ