रचना - मासी जी ने हंसते हुए स्वाति को देखा तो उनकी हंसी अपने - आप रुक गई और चाय का कप वहीं टेबल पर रखते हुए । स्वाति की तरफ भागी । स्वाति अपने हाथों से अपना चेहरा ढक कर खड़ी थी । स्वाति ने जब अपनी आंखें खोल कर देखी तो अपने आप को हल्दी के पानी में पूरी तरह से भीगा हुआ पाया । उसकी आंखों से आंसू बह निकले । वो किसी को कुछ ना कह कर अपनी छोटी बहन के कमरें में चुपचाप चली गई । स्वाति के जाते ही मौसी जी उस वेटर पर दाना - पानी लेकर चढ़ गई ।
मौसी जी - तुम्हें अक्ल नहीं है क्या ! कितनी बार समझाया था कि नीले कलर को पानी में मिलाकर लाना । लेकिन तुमने क्या किया । उस पर हल्दी पानी डाल दी । पता नहीं मेरी बच्ची पर क्या बीत रही होगी ! वेटर ने माफी मांग कर वहां से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी और वहां से चला गया । स्वाति की मां ने किसी तरह अपनी बहन को किसी तरह शांत करा कर । दोनों स्वाति के पास गई । स्वाति उस बाथरूम में नहा रही थी और हल्दी से लगे । दाग को निकाल रही थी । काफी समय तक स्वाति जब बाहर नहीं निकली तो अंजलि जी को स्वाति की चिंता हुई । बहुत मनाने पर जब स्वाति बाथरूम से बाहर आई तो स्वाति की आंखें लाल थीं और अभी भी उसके चेहरे पर हल्दी के दाग़ लगे हुए थे । स्वाति ने अपनी बहन का नाईट गाऊन पहना हुआ था । स्वाति ने बैड पर बैठते हुए कहा - अब मैं क्या पहनूंगी मासी , मेरे सारे कपड़ों पर हल्दी के दाग़ लग गये हैं । बोलकर स्वाति रूआंसी हो जाती है । मौसी जी समझाते हुए कहती हैं - बेटा जो हुआ उसे भूल जा । मेरे पास कुछ कपड़े है । जो बिल्कुल हल्के कलर के हैं और तुम्हारें नाप की भी है । तुम चाहो तो उसे पहन सकती हो । क्योंकि मार्केट में सफेद रंग के सूट या साड़ी मिलना थोड़ा मुश्किल है और तुम्हें उसमें काम करवाने पढ़ सकते हैं । गुड़िया तुम्हें इन्हीं कपड़ों में एडजस्ट करना पड़ेगा । स्वाति की मौसी स्वाति को बहुत प्यार से समझा रही थी जिसे स्वाति चुपचाप सुन रही थी । मौसी जी ने स्वाति के लिए कपड़े भिजवाये । जिसमें अधिकतर लान्ग घेरेदार वाली सूट थी । हल्के गुलाबी रंग के और आसमानी रंग , क्रीम कलर और बहुत से हल्के रंग के कपड़े थे । स्वाति जब हल्के नीले रंग की सूट पहन कर , बालों में क्ल्चर लगा कर उन्हें खुला छोड़ दिया और माथे पर काली मगर छोटी बिंदी लगाकर बाहर निकली तो देखने वाले स्वाति को देखते रह गए । स्वाति जब बाहर निकली उस समय दूसरे माले पर लड़के वाले रुके थे । वहीं पर एक जोड़ी आंखे स्वाति को बहुत ध्यान से देख रही थी ....
क्रमशः
रचनाकार - श्वेता सोनी

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