चार माह का वक्त है।
देवशयन कहलाता है।
जीवजंतु सब राह तके
वर्षाकाल जब आता है।
सब घरों में स्थिर हो
धर्मध्यान का पाठ करे
सावन में शिव रुद्री करे
महामृत्युंजय का जप करे
योगी मुनि ध्यान धरे
प्रकृति आनन्दमय भरे
भादव में भगवान की सेवा
पाते सब धर्म का मेवा
लहरिये सी लहराती फसले
नया धान ले आती फसलें
कर कार्तिक में नव श्रंगार
घर को चमका नए द्वार
आसोज की नवराते में
होता माँ की पूजा अपार
धन धान्य ओर धर्म की
करता चौमासा भी जय जयकार
संध्या पंवार

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