सुबह दरवाजा खटखटाने से उसकी नींद खुली सामने दीवार की ओर घड़ी को देखा तो सुबह के आठ बज रहे थे । स्वाति जल्दी से अपने सर पर पल्लू लिए दरवाजा खोला । अपनी सास को देखा तो पल्लू संभालते हुए उनके पैर छुए । स्वाति की सास ने अपनी नई नवेली बहू को ऊपर से नीचे तक देखा और राजेश के बारे के बारे में पूछा । स्वाति ने जब बताया की राजेश कल रात से घर नहीं आये है । जिसे सुनकर सरला देवी स्वाति को तैयार होकर कमरे से बाहर आने को कहकर चली गई । सरला देवी अपने पति को सारी बात बताकर अपना सर पकड़कर बैठ गई और आंखों में आंसू लाते हुए अपने पति से कहा - देखा अपनी जिद करने का नतीजा रात भर से मेरा बेटा पता नहीं कहां भटक रहा होगा ।
गोपाल प्रसाद जी अपनी पत्नी की बातों पर ध्यान न देकर सिर्फ यही सोच रहे थे की स्वाति पर क्या बीत रही होगी । यही सोच कर वो स्वाति को समझाने जा रहे थे तभी सामने से राजेश आता हुआ दिखाई दिया । गोपाल प्रसाद जी राजेश से पूछने लगे कि वह रात भर कहा था । राजेश - मैं अपने एक दोस्त के साथ था । राजेश ने लापरवाही से कहा और वहां से चला गया । अब तो आए दिन राजेश का अपने पिताजी से तू तू - मैं मैं हो जाती थी । उनके मां के हस्तक्षेप से ही राजेश चुप होता और गुस्से से वहां से चला जाता । ऐसे ही समय बीत रहा था । साल भर हो गये थे स्वाति और राजेश की शादी को स्वाति को लगता था कि राजेश अब रिचा को भूल गए होंगे । लेकिन यह स्वाति की गलतफहमी थी । एक दिन स्वाति ने राजेश को किसी से बात करते हुए देखा और जब राजेश फोन कट करके घर से बाहर निकल कर जाने लगे तो स्वाति ने राजेश का पीछा करने लगी । राजेश का पीछा कर वह एक होटल मून में पहुंची और जब उसने राजेश को एक लड़की के साथ रुम में जाते देखा तो स्वाति समझ गई कि राजेश अब तक रिचा को भूल नहीं पाया है । " एक औरत सब कुछ सहन कर सकती हैं लेकिन अपने पति को किसी और के साथ नहीं देख सकती "। किसी तरह घर आकर स्वाति ने अपने आपको संभाला और राजेश के घर आने पर उनको समझाना चाहा तो , राजेश ने स्वाति पर हाथ उठा दिया । ये कहकर कि , अब तू मेरा पीछा करने लगी । अब जब तुझे सब पता ही चल गया है तो इस सब की अब आदत डाल ले यही तेरे लिए अच्छा होगा । जब स्वाति ने ये सब मानने से इंकार कर दिया । तो राजेश ने गाली देते हुए उस पर हाथ उठा दिया । और गाली देते हुए कहने लगा ! साली अब तू मुझसे ज़बान लड़ाती है । तड़ाक....तडा़क...1 ,2 ,3 पता नहीं कितने थप्पड़ मारता रहा राजेश ने । राजेश की मार खाकर स्वाति सामने की ड्रेसिंग से टकरा कर गिर पड़ी । उसके सिर और ओंठ से खून बहने लगा । स्वाति को बेहोशी छाने लगी और बेहोशी की हालत में देखा कि राजेश ने उसके उसकी मांग का सिंदूर पोंछ कर । गले से मंगलसूत्र निकाल कर ये कहते हुए वहां से चला गया कि , आज के बाद मैं तेरे लिए मर गया और आज के बाद तू विधवा की तरह जिंदगी जीयेगी । राजेश ने घर की आलमारी से जरूरी कागजात निकाल कर अपने अपने सामान के साथ रख कर वो घर हमेशा के लिए छोड़ कर रिचा के पास हमेशा के लिए चला गया । जिस समय में सब हुआ उस समय स्वाति के सास - ससुर किसी रिश्तेदार के यहां चले गए । कुछ समय बाद स्वाति के सास - ससुर घर वापस आये । और उन्होंने घर खुला देखा
किसी अनहोनी की आंशका से वो घर में दाखिल हुए । सामने देखा तो स्वाति बेहोश पड़ी हुई थी । उसके सर और होंठ पर से खून बहने लगा था। ....
क्रमशः
रचनाकार - श्वेता सोनी

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