न जाने कैसा, ये फैल चुका उन्माद
सम्पूर्ण विश्व झेल रहा जो, वो है आतंकवाद
लाखों लोगों का क़त्ल करते हैं, नाम देते हैं जिहाद
ऐसी बीमार मानसिकता को रोक लो, वरना कर देंगे बरबाद
इनकी बर्बरता से अपाहिज, न जाने कितने परिवार
सिर्फ रह जाते हैं देखते, बेबस और लाचार
इसको मिटाना है तो, हर वक़्त तैयार रहे टास्क फ़ोर्स
तभी आएगा इनको, अपने किये का भी होश
इन आतंकवादियों को क्या, तनिक भी होता नहीं भान
कि कोई अगर इनके परिवार को मारे तो, क्या नहीं निकलेगी इनकी जान
ये मुद्दा आज से नहीं, बहुत पहले से गरमाया है
इसमें राजनीति भी कम नहीं, ये कैसा धुंधला साया है
पडोसी मुल्क भी, इससे बाज आता नहीं
तभी अपने कारगुजारी से, नजर तक मिलाता नहीं
जबकी वो खुद, इस दंश को झेल रहा है
वो खुद मोहरा बना है जो, दूसरे से खेल रहा है
अब इन आतंकवादियों को, ये खेल ख़त्म करना होगा
जो मौत ये सबको देते हैं, वही मौत इनको मरना होगा
धन्य है मेरी भारत सेना, धन्य है वीर जवान
धन्य है हमारी खाकी वर्दी, धन्य पुलिस महान
इनकी मुस्तैदी ही है जिनसे, बढ़ता अपना अभिमान
अपने देश की सुरक्षा मे, जो हो जाते हैं कुर्बान
इनके बलिदान को इस लखनवी का प्रणाम
सबसे आगे रहे हमारा ये धराधाम ये हिंदुस्तान
जय हिन्द जय भारत
मुकेश लखनवी

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