नई पौध हूं , नई फसल का
    विकसित होकर, खाद्यान्न बनूँ
    भरण-पोषण, करूं मैं सबका
    किसान का ,जीवन निर्वाह बनूँ  🌾

     नई पौध हूं , उन पेड़ों का
     विकसित होकर, छायादार बनूँ
     राह पथिक को, छांव मैं देता
     गृह जैसा , आराम बनूँ    🌳      
     
     नई पौध हूं , उन पौधों का
     विकसित होकर ,मैं डाल बनूँ
     कलियां खिले, उन डालो पर
     फूलों का , सुंदर हार बनूँ   🌷

      नई पौध हूं , उन पेड़ों का
      विकसित होकर ,फलदार बनूँ
      खट्टे-मीठे , फल देता हूं
      इंसा, पशु,पक्षी का आहार बनूँ  🌴

      नई पौध हूं , मैं प्रकृति का
      सृष्टि का , निर्माण करूं
      देखभाल की , सिर्फ चाह रखूँ
      परोपकारी हो, सबका कल्याण करूं 🌲
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               ✍️मनीषा भुआर्य ठाकुर (कर्नाटक)