जिन्हें हम प्यार करते हैँ ;उन्हें वो इज़्ज़त नहीं देते...
जिनकी वो हकदार होते हैँ। मानो उन्हें प्यार करना उन पर एक अहसान हो! जिन्हें हम प्यार करते हैँ..उन्हें उनकी कमियों के साथ स्वीकार नहीं कर पाते ;
महापुरुष या महादेवी की श्रेणी में ही हो तो ही उनको अपेक्षित आदर दे पाते!!क्या किसी का इंसान होना काफी नहीं? क्या उनमे अच्छाईयों के साथ उनकी कमजोरियां मानवीय नहीं?? क्या उनका हमारी और प्रेमपूर्ण भाव से देखना ही पारितोषिक नहीं?? क्या उनका हमसे आपेक्षित  सत्कार वांछिनीय नहीं। काश हम जिन्हें प्यार करते हैँ उनका आदर भी कर पाते..
उन्हें उनकी कमियों के साथ स्वीकार कर पाते!! किसी को सम्मान देना शायद सबसे बड़ी स्वीकृति है स्वयं सर्वव्यापी ईश का!!
                             
                                     

   ~डॉ पल्लवी कुमारी"पाम "