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कल तक तुम्हारी शहादत को,
छाप रहे थे सब अखबार !
तेरी ठंडी चिता के बाद न आया,
हाल पूछने कोई द्वार !!
कच्चा घर है,टूटी ड्योढ़ी,
चुती छत पीड़ा गाती है !
बोलो कैसे काटूं जीवन ,
याद तुम्हारी आती है !!
तेरी बहन के हाथ करने थे पीले ,
दहेज की मांग बढ़ी है !
कैसे झांपू पुरखों की इज्जत,
चादर छोटी पड़ी है !!
पग-पग पर तेरी कमी ,
आंखों को छलकाती है !
बोलो कैसे काटूं जीवन ,
याद तुम्हारी आती है !!
यह है जो तेरी नन्ही परी ,
हुई है थोड़ी सी पहले से बड़ी !
चलना अभी नहीं जानती है ,
रहती मेरे सहारे खड़ी !!
पापा-पापा कह कर वो,
तुमको रोज बुलाती है !
बोलो कैसे काटूं जीवन ,
याद तुम्हारी आती है !!
छाए रहते हैं मेघ काले गगन में,
फिर आया है सावन झूम कर !
टूटा है बांध पलकों का मेरे भी ,
हमें बिलखूं तेरी फोटो को चूम कर !
धवल वस्त्र धारण किए हूं ,
हरियाली कहां मन को भाती है !
बोलो कैसे काटूं जीवन ,
याद तुम्हारी आती है !!
......✍️ पिंकी मिश्रा
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर सभी शहीदों को शत् शत् नमन करती हूं !

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