अकेले नहीं चल संग चले
जन्मभूमि से होकर विदा 
कर्मभूमि की नई राह चले
दूनिया के अनजान रास्तों पर 
आ चल चलें आ चल चलें
आ चल चलें आ चल चलें।।

कह रहा पिछे खड़ा बचपन
उंगली पकड़ मुस्कुराता हुआ
आ लग जा एक बार गले
अनजान सुनसान रास्तों पर 
किसे खबर फिर कब मिले
किसे खबर फिर कब मिले।।

ना होना तू जीवन में कभी उदास 
मन में रखना सदा  विश्वास
कुछ पा न सका कोई  यहां होकर हताश
आज नहीं तो कल मूठ्ठी में होगा सारा आकाश
टेढ़ी मेढी जीवन राह में
चलते ही जाना बस काम तेरा
जीवन राह में फूल मिले चाहे कांटे मिले
आ चल चलें आ चल चलें।।

अकेले नहीं चल संग चले
जन्मभूमि से होकर विदा 
कर्मभूमि की नई राह चले
दूनिया के अनजान रास्तों पर 
आ चल चलें आ चल चलें


यादों की गठरी बांध 
अलविदा, फिर मिलेंगे चल कह चले
जवानी खड़ी है राह में बांह फैलाए 
कह रही हिल मिल भविष्य की नई डगर चले
साहस का दामन थाम
रखना हर घड़ी हर पल बुलंद होंसले
चलते ही जाना बस काम तेरा
जीवन राह में अमृत मिले चाहे जहर मिले
आ चल चलें आ चल चलें।।

कर्म ही ईश्वर कर्म ही पूजा 
जीवन में कोई काम ना दूजा
धूप छांव के इस जीवन में 
जीवन की नई राह चले
ना रूकना ना थकना रोशनी हो चाहे हो अंधेरा
चलते ही जाना बस काम तेरा
जीवन राह में ज़ख्म मिले चाहे मरहम मिले
आ चल चलें आ चल चलें।।

अकेले नहीं चल संग चले
जन्मभूमि से होकर विदा 
कर्मभूमि की नई राह चले
दूनिया के अनजान रास्तों पर 
आ चल चलें आ चल चलें।।

पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐