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उन  कारगिल के शहीदों को नमन,
सबसे ऊपर रख्खा जिन्होंने वतन।
माँ के लाल , क्रोध से तन गए ,काली से भृकुटि तन गए,
जब भारत माँ के आँचल पर रख्खा शत्रुओं ने कदम,
छोड़ आए जो देश हित घर और रिश्तों का मोह सभी,
आज देश हित कर गए जीवन भी समर्पन ।

छूट गए दुश्मन के पसीने कायर सभी भागे  
जब रण में लोहा लेने हर प्रदेश के सैनिक आए आगे,
न कोई हिन्दू, मुस्लिम,सिख,न कोई जाट मराठा था , 
सब थे भारत के लाल मां भारती से सबका नाता था।
देखकर विश्व भी हो गया हैरान हर बटालियन ने दिखाया  साहस अदम्य।

है धरा तब तक हर शहीद का साहस गाया जाएगा,
562, शहीदों की शहादत का इतिहास दोहराया जाएगा,
कल आने बाली पीढ़ी को इन्हें पढ़ाया जाएगा,
तब हर भारतीय का सीना  चौड़ा हो जाएगा,
हर सैनिक को उत्साह देगी कारगिल के शहीदों के वर्णन।

जब कभी भी कोई माँ भारती पर आँख उठाएगा,
है सौगन्ध  शहीदों की, फिर कारगिल दोहराया जाएगा,
करके नमन इन वीरों की वीरता, बढ़ेगा हर कदम,
लेके हाथ में तिरंगा शान से उठेगा हर कदम,
विश्व का बन कीर्तिमान भारत का परचम लहराएगा।

जब करते याद कुर्वानी अश्रुपूरित हो जाते हैं नयन,
धन्य हैं, वो मात पिता, धन्य है वो प्रिया, वो बन्धु सखा, धन्य हैं वो गाँव शहर,वो वन उपवन पले बढ़े जहाँ,
धन्य है वो भारत की भूमि, जिसकी रज को ,
मस्तक पर लगा, तिरंगे का केसरिया वाना बना जिनका कफ़न।

है नमन ,है नमन वीर तुमको बार बार नमन,
तुम्हारी यशोगाथा पर पृथ्वी छोटी ,छोटा गगन,
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अन्जू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।