चलो प्रियतम ! कहीं घूमें..., 
मौसम ये बरसात का है ।।
बूंदों को गालों से चुमें ...,
मौसम ये बरसात का है।।

बरखा जल से खेलें
कुछ अठखेलियां ले लें।
रिमझिम के संग झुमें...,
मौसम ये बरसात का है।।
चलो प्रियतम ... बरसात का है।।

हरितीमा के नीचे,
चलते रहें हाथों को थामें। 
कोई प्रणय गीत गुनें...,
मौसम ये बरसात का है ।।
चलो प्रियतम.....बरसात का है ।।

बैठ झुलें पे साथ में
एक दूजे में मगन झुलें
धड़कनों को हम सुनें..., 
मौसम ये बरसात का है ।।
चलो प्रियतम ..... बरसात का है ।।

सुंदर इस ऋतू में
चलो दिन सुंदर हम बिताएं । 
कुछ मीठे स्वप्न बूनें...,
मौसम ये बरसात का है।।
चलो प्रियतम..... बरसात का है।।
बूंदों को............बरसात का है।।


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    स्वरचित व मौलिक
 ✍️कीर्ति रश्मि नन्द
         वाराणसी