बचपन से ही सुनती आ रही थी अनामिका कभी दादी, कभी ताई, चाची से कभी माँ से वह इस घर में किसी और कि धरोहर मात्र है, यहां उसकी दुनिया नही , उसकी दुनिया अलग है।
अक्सर सोचा करती कैसी होगी वो नयी दुनिया।
धीरे -धीरे बड़ी हुई तो फिल्मों को देखकर समझ आ गया सब कि ऐसी होगी उसकी नयी दुनिया।
और आज  उसका प्रवेश हो गया अपनी नयी दुनिया में,
पर यह क्या ? न गुब्बारों से , न फूलों से सजा  न ई खुश्बुओं से महका अरे कुछ भी नही था इस नई दुनिया मे वैसा जैसा उसने देखा था जाना था फिल्मों में।
  बस सके बैड  उसपर साफ सुथरी, या नयी बिछी चादर तखिए बराबर में रखें स्टूल पर एक पानी का जग साथ एक गिलास, साइड से रखी अलमारी मेज पर रखी कुछ किताबें ,मन उलझ कर रह गया। अरे यह तो किसी पढ़ने वाले विद्यार्थी का कमरा लग रहा है।
तभी पूरे कमरे में दीवार पर लगी राधा कृष्ण की बड़ी सी फोटू उसके मन को कुछ राहत दे रही थी, तभी कदमो की तेज आहट ने उसके ध्यान को तोड़ा , वह झट से घूँघट डालकर बैठ गयी जैसा इसने देखा था।
पर यह क्या वो तो ननद जी निकली जो उसे कपड़े  चेंज कराकर अपने साथ नीचे ले गयीं खाना खिलाने के लिए।
उसे अपने आप पर कितना गुस्सा आ रहा था , और हँसी भी , खुद से ही बुदबुदा रही थी अरे पागल वो तो पिक्चर होती तो डारेक्ट दिखाते वो सब शादी के बाद ,पर यह तो हकीकत है ।
खाना पीना  निपटाकर सभी बातें करने लग गए पता ही नही चला कब 12 बज गए सासू जी, न आती तो शायद अब भी सब बैठे रहते ।
खैर ननद रानी , हँसी ठिठोलो करती उसे कमरे के बाहर तक छोड़ गयीं।
कमरे में गुलाबी कलर की नाइट बल्ब की रोशनी हो रही थी अभी उसने कुछ सोचकर मुस्कुराते हुए अन्दर जाने को
कदम उठाया ही था।
अरे !यह क्या? पतिदेव  तो पहले से कमरे में विराजमान थे, यह सीन भी उसकी दुनिया से विपरीत था।
अरे क्या क्या सोचा था लम्बा घूँघट डालकर बैठेगी पतिदेव
उसे हाथों से उठाएंगे  , वह कितना शर्माएगी  , घबराहट होगी ।
पर हाँ एक बात मिली नयी दुनिया में शरमा घबरा वो रही थी।
बचपन से ही स्वभाव से चंचल थी अनामिका जो होता पट से कह देती ।
दिल कह रहा पूछे कमरे में पहले दूल्हा आता या दुल्हन,
और जब आ ही गए तो घूँघट भी डालकर बैठ जाती मैं ही उठा देती।
क्या? सोच रही हो अन्दर आओ अनामिका,
पतिदेव के प्रीत भरे वाक्यों ने उसे हवासों में लौटाया।
न कदम आगे बढ़ते न पीछे मानो वहीं स्टैचू  हो गयी।
पतिदेव ने पास आकर कहा क्या हुआ अन्दर चलो बाहर बहुत शर्दी है, ऊपर से बारिश भी हो रही ।
वह धीरे से साइड से रूम में आ गयी पर  यह क्या अंदर से   अजीब सी घबराहट हो रही थी।
पतिदेव को जाने क्या सूजी  गिलास में पानी ले आए ,
उसने भी झट से सारा पानी पी लिया।
फिर हैरत में पड़ गयी अरे रे,! यह सीन भी उल्टा हो गया।
अरे मुझे लाना था दूध , पतिदेव ले आए पानी।
अरे कैसे लाती किसी ने दिया ही नही।
तभी पतिदेव ने हौले से उसका हाथ थामकर उसे बैड पर बिठा दिया और एक मखमली डिब्बे से प्यारा सा नेकलस उसको पहना दिया फिर पूछा कैसा लगा।
अरे पहनाने से पहले कौन सा हमें दिखाए थे जो पूछ रहे कैसा लगा।
कह दिया  बहुत अच्छा।
फिर इधर उधर की बातें हुंई जिनमे पतिदेव  आधे सबालों का जबाब खुद ही दे रहे थे, अनामिका बस  हां न में सिर हिला रही थी।
तभी बहुत जोर से तेज बिजली कड़की आसमान में और हवाओं का रुख तेज हो गया मानों वो भी मचल उठीं ,
आकाश और धरती का मिलन हो रहा था उस बरसात की बूंदों से।
और वह पल एकदम पिक्चराइज था जैसी उसकी नयी दुनिया थी उसके मुताबिक ।
वो मौसम वो बारिश साक्षी बन गए उनके मिलन के।
और पिया के सानिध्य में उसने पदार्पण कर दिया अपनी नयी दुनिया में।
मम्मी क्या हुआ  क्या सोच रहीं देखो बारिश ने आपको भिगा दिया ।
जब बेटे ने हाथ थामा तो ख्यालों की दुनिया से बाहर आयी ।
अरे कुछ नही, चलो तुम खाना खा लो।
उसने अपने 8 साल के बेटे को दाल चावल डाल कर अपने हाथ से खिलाने लगी, बेटा अपने खिलौनों में लग गया और वह फिर खो गयी ख्यालों में।
शादी को पूरे 12 साल हो गए ,   उस रात के बाद उसे हर पल जिंदगी का नया रूप रंग मिला ।
नयी दुनिया मे  पति के प्यार के साथ मिली नित नई समस्याएं और उन्हें सुलझाने के नए तरीके।
आज सारा घर उसके ही हिसाब से चलता है , पल पल की जिम्मेदारी उसकी सुबह से शाम तक कई बार जिन्दगी को मिल जाती नयी दुनिया।
कभी पति के ऑफिस आने के बाद  कैसी हो तुम पूछने में, कभी बेटे की मुस्कुराहट में,  कभी रात को सोते वक्त हौले से हाथ थामकर यह कहने में यार तुम कितना करती हो, तुम न होती तो मुझे तो जिन्दगी जीना ही न आता।
तभी दरवाजे की बजती घण्टी ने चौका दिया अरे !बाबा 
वो ऑफिस से आ गए और मै अभी तक ख्यालों की दुनिया मे ही गुम रही।
झट से दरवाजा खोला उड़ी चिरपरिचित मुस्कान के साथ श्रीमानजी विराजमान थे।
झट से चाय बनायी , और पूछा कैसा रहा आज का दिन आपका ।
अच्छा था, तुम बताओ क्या किया पूरे दिन जो अपनी लहराती जुल्फों को नही बाँधा आज।
अरे कुछ नही बस यों ही ,
यों ही कुछ नही होता बीबी, अच्छा आज खाने में क्या बना रही हो।
आप जो कहें बना देती।
तो आज कुछ नही बनाओ,
क्या! क्यों?
क्योंकि मौसम बहुत अच्छा है यो चलो चलते बाहर आज कुछ खाते बहुत दिन से जाना भी न हुआ, चलो हो जाओ तैयार।
कुछ समय मे ही तेज हवाओं ख़ुशगवांर मौसम के साथ प्रकृति का लुत्फ ले रहे थे।
वैसे एक बात कहूँ अनामिका ,
हाँ,
यह पिंक लिपस्टिक को थोड़ा और गहरा टच दी होती तुम तो और अच्छा होता।
और आज फिर इस छोटी से बात ने उसके मन को नयी दुनिया से मिला दिया।
और अब वो अच्छे से समझ चुकी थी कि नयी दुनिया पिक्चर जैसी मन मुताविक न होती ।
कारण भी समझ चुकी थी, पिक्चर का हर सिन सहूलियत के अनुसार लिखता लेखक ।
पर जीवन की दुनिया को लिखने वाला लेखक वो ऊपर वाला पल पल नयी दुनिया से मिला देता ।
पर जो भी है बहुत प्यारी है उसकी यह पल पल मिलती 
नयी दुनिया।

अन्जू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।