मेरे तमस भरे
संसार में ये जो
रोशनी की किरण
आई हैं तुम्ही से हैं
सदियों से अँधेरो में पत्थरों से
टकराती भटक रही थीं
राहों में सहारे की जो लौ
टिमटिमा रही हैं तुम्ही से हैं
अंतस मन में विरह का
अथाह समंदर हिलोरें ले रहा
मिलन की उम्मीद की
दिखती किरण तुम्ही से हैं
रात्रि के घनेरे अंधकार
के बाद भोर की
पहली प्रकाशित
भानू रश्मि तुम्ही से हैं
अमावस की काली
परछाई के बाद
आसमाँ में बिखरी पूर्णिमा की
रोशन छटा तुम्ही से हैं
जीवन बगिया में
मुरझाये फूल फिर से
खिल उठे उन फूलों से
महकी खुशबू तुम्ही से हैं ।।
.........@ नेहा धामा " विजेता "

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