अंध विश्वास की जड़, होती बहुत कठोर
इससे उबरने मे, लगता है बहुत जोर
ये तो मायाजाल है, इससे बचे न कोय
और जो इससे बच गए, तो दुख काहे की होय
कहत "लखनवी" सुन भई साधौ, इससे बचो श्रीमान
दिखाओ रोग चिकित्सक को, बचा लीजियो जान
अन्धविश्वास वो आग है, जिसमे कबहुँ न जाय
और अगर चले गए, बिन झुलसे न आय
मेरी बात मानिये, रखो सबको अंधविश्वास से दूर
खुद भी सुखी रहो, कुटुंब को सुखी रखो भरपूर
अब भी अगर नहीं चेतोगे, तो पड़ना पड़ेगा पछताना
फिर इस समस्या को लेकर, लखनवी के पास न आना
धन्यवाद
आपका मुकेश लखनवी

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