क्यों जाते हो मयखाने में,
मेरी इन नशीली आँखों मे,
तुम खो क्यों नही जाते।
मेरी यह लहराती जुल्फें,
तुमको सावन सी ठंडक,
इन जुल्फों के साए में सो क्यों नही जाते।
दो सुर्ख गुलाब की पंखुड़ी से मेरे होठ,
भुला देंगे तुम्हें तुम्हारा पता,
एक बार इस मधुशाला में अपने दिल को डुबो क्यों नहीं जाते।
सारे गम से निजात दे देगा तुम्हें,
मेरी, चूड़ी पायल का संगीत,
मेरे चाँद से चेहरे के लरजते भावों में भिगो क्यों नही जाते।
अन्जू दीक्षित,
बदायूँ ,उत्तरप्रदेश।

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