शहर में है एक घर,
चमकता हुआ घर
चारों और से बंद डब्बे जैसा घर
ऐशोआराम और सुविधाओं से भरा घर,
अपना होके भी नहीं लगता अपना ये घर......।
बरसों बाद आई मैं अपना घर
सोंधी मिट्टी की खुशबू से भरा घर,
जुगनुओं की तरह चमकता मेरा घर
प्राकृतिक सुविधाओं से भरा घर,
ये है मेरा अपना घर खुशियाँ और सुकून है जिसमें
अपना सा लगता है मुझे मेरा घर.......।
ऋचा😊✍

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