भारत में रहने वालो'
मूर्खता न दिखालाओ!
अपनी मातृभूमि न छोडो, 
अब विदेश तुम मत जाओ!! 

अपने देश को स्वर्ग बनाओ, 
मिट्टी को चन्दन कर दो! 
हर पुत्र मे राम बसे अब, 
खुद को रघुनंदन कर दो!! 


खुली आँख से सपने देखो, 
अप्रवासी का दर्द न झेलो! 
धन दौलत के चक्कर में, 
रिश्तों को तुम न तौलो!! 

भारत अपनी जन्मभूमि, 
देश पराये क्यों जाना! 
अपने घर मे रहो सुरक्षित, 
विदेशी क्यू अपनाना!! 


श्रीमती रीमा महेंद्र ठाकुर लेखिका रानापुर झाबुआ मध्यप्रदेश भारत