पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मोहित आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन पे जाता है,जो कि कामयाब रहता है!लेकिन अचानक ही अजीब सी परिस्थितियों में मोहित गायब हो जाता है,अब आगे-
साँची पूरी तरह से टूट चुकी है लेकिन हिम्मत नही हारी है!उसने फैसला कर लिया है कि अब पूरी कोशिश करेगी मोहित का पता लगाने की!अब वो खुद से ही मन में बाते कर रही है मैंने आखिर एक फौजी से प्यार किया है कोई खेल नही!अब खुद के दिल को भी फौजी के दिल की तरह ही मजबूत करना होगा!क्या हुआ अगर वो मेरी माँग नही भर पाया,क्या हुआ अगर सात फेरे नही हो पाए,क्या हुआ अगर समाज नही समझ सकता हमारा रिश्ता लेकिन एक बात जो बिल्कुल सच है कि मैंने मोहित को अपना सब कुछ मान लिया है और अब उसी का इन्तेजार करुँगी!
दूसरी तरफ,मोहित के माँबाप बहुत परेशान है और वो कश्मीर में उसी कमरे में रुके है जहाँ मोहित रुका था!साँची परवीन के साथ हिम्मत करके उनसे मिलने जाती है और उन्हें पूरा हौसला देती है!वो मोहित की माँ को अपने हाथों से खाना खिलाती है!उसकी बातों से मोहित के माँबाप को बहुत हिम्मत मिलती है!मोहित की माँ को अब शक होता है और वो पूछती है बेटी तुम इतना कैसे जानती हो मेरे मोहित को?
साँची की आँखों मे एक आत्मविश्वास है और वो बिना जुबान लड़खड़ाए पूरे भरोसे के साथ कहती है आंटी जी मैं और मोहित एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और अब चाहे वो आए या ना आए पूरी जिंदगी उसी के इन्तेजार में काटनी है!
मोहित की माँ को थोड़ी सी भी उम्मीद नही थी इस जवाब की इसीलिए वो हैरान होकर साँची से पूछती है ये क्या कह रही हो तुम?ऐसा कैसे हो सकता है?अगर ऐसा होता तो वो हमें तो बताता!
आपने सही कहा आंटी जी,वो आपको जरूर बताता,लेकिन उसे इतना समय ही नही मिल पाया!बहुत छोटी सी है हमारी प्रेम कहानी जिसमे ना कभी मुझे मौका मिला उनसे रूठने का,ना ही कभी वो मुझे मना पाए!ना ही ज्यादा मुलाकातें हुई,ना ही ज्यादा जज़्बात एक-दूसरे को बता पाए!कुछ मिला तो सिर्फ रूह से रूह मिली हमारी,कोई याद भी है तो उनका मेरे हाथ की बनी हुई दाल बाटी खाना!बस वही मुलाकात है जो जीने का सहारा है अब!ये कहते-२ साँची की आँखे भर आईं हैं और मोहित की माँ भी उसकी आँखों मे अपने बेटे के लिए सच्चे प्रेम को देख पा रही है!
वो अब साँची को कुछ नही कहती बस अपनी आँखों मे आँसू लिए हुए उसके सिर पर अपना हाथ रख देती है!अब दोनों ही मोम की तरह पिंघल जाती है और एक-दूसरे के गले लग कर खूब रो रही हैं!मोहित के पापा भी उन्हें ऐसे देखकर रोने लगते हैं और वहाँ का माहौल बहुत ही गमगीन हो चुका है!
दूसरी तरफ अब आतंकवादियों का संदेश आ चुका है ,जिन्होंने ये शर्त रखी है कि लेफ्टिनेंट मोहित के बदले उनके मालिक हसीब खान(काल्पनिक नाम) को रिहा करना होगा!सरकार के ऊपर भी अब विपक्षी दलों का हद से ज्यादा दबाव बन रहा है!मीडिया दिन-रात इसी खबर को सुना रही है और सारे भारतवासी मोहित के सुरक्षित वापिस लौटने की प्रार्थनाएं कर रहे हैं!
दूसरी ओर,वहाँ से मीलों दूर एक छोटे से कमरे में मोहित कैद है और उसके हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए हैं और उसे एक कुर्सी से बाँधा हुआ है!उसके शरीर पर जख्मों के निशान है जिनमे से खून निकल रहा है!उसके चारों ओर कई आतंकवादी खड़े हैं,जिन्होंने बंदूकें तान रखी है!मोहित का हर पल भारी हो रहा है!
दूसरी ओर,अब इस बात का पता चल चुका है कि ये सब साजिश के तहत हुआ है,वहाँ पर ओर भी आतंकवादी छुपे हुए थे,जो सिर्फ मोहित को पकड़ने के लिए ही छुपे थे!जब मोहित दुबारा वहाँ गया तभी उसका अपहरण करके गुप्त दरवाजे से ले जाया गया,ये सारी जानकारी एक टीम द्वारा दी गई है,जो मोहित के केस के लिए बनाई गई है!एक बात ओर जो अब पता चली है कि कोई उनमे से ही है जो आतंकवादियों से मिला हुआ है!
उधर ,साँची के प्यार की भनक सभी को लग चुकी है,आस-पड़ोस में ये बात चिंगारी की तरह फैल चुकी है!साँची मोहित के लिए सच्चे मन से व्रत रख रही है !जब इन सारी बातों का पता साँची के पापा को चलता है तो वो साँची को एक जोर से थप्पड़ लगाते हैं और मोहित को भूल जाने को कहते हैं!
साँची भी साफ कह देती है पापा मन से उन्हें सब कुछ मान चुकी हूँ इसीलिए अब चाह कर भी उन्हें नही भूल सकती हूँ!अब सारी जिंदगी या तो उनके साथ गुजारूँगी या उनके इन्तेजार में!
जा सनम मुझको है प्यार पे ऐतबार
मैं करुँगी तेरा इन्तेजार
हाँ मगर मुड़के तू देखले एक बार
मैं करुँगी तेरा इंतेजार
जितनी बार इंडियन आर्मी की टीम आतंकवादियों के ठिकानों पर छापे मारती है,उतनी ही बार वो पहले ही जगह बदल लेते हैं!कोई गद्दार पहले ही सब जा कर बता देता है!समय बीत रहा है लेकिन मोहित का कुछ पता नही चल पा रहा है!अब सरकार मजबूर हो चुकी है उनकी शर्त मानने को!
साँची दिन रात मोहित के लिए व्रत रख रही है,अखंड ज्योत जला रही है और एक बेटी बनकर मोहित के माँबाप को भी सम्भाल रही है!बस उसे इन्तेजार है अपने मोहित के लौटने का!
दूसरी ओर,मोहित का भी एक मात्र सहारा है और वो है अपनी साँची की याद!आज मोहित सोच रहा है काश इतनी जिंदगी भगवान देदे कि साँची के साथ कुछ हसीन लम्हे जी सकूँ!क्या सच मे एक फौजी की प्रेमकहानी इतनी छोटी होती है?क्या एक फौजी को प्यार करने का कोई हक नही?
अगला भाग-कल
ॐ नमःशिवाय
🙏🙏🙏🙏🙏

0 टिप्पणियाँ