मेरे वालिद साहब मेरे पसंदीदा हीरो हैं।
वे बचपन मे ही यतीम हो गये थे । बड़ी औलाद होने की खातिर उन्होने अपने छोटे भाई बहनो की अच्छे से परवरिश की । पैसों की किल्लत थी मगर भाई बहनों को ज़रा भी एहसास नही होने दिया । दिन रात मेहनत की । और सबकी शादियॉ कर बाखूबी अपना हर फर्ज़ अदा किया ।
 वालिद साहब मेहनती होने के साथ साथ ईमानदार , नेक दिल और सच्चाई पसंद करने वाले शक्स थे ।
 दिल में औरों के लिये दर्द भरा था और हर एक शय की कद्र करते थे । इंसानियत से भरे हुये थे ।
  मेरे अंदर जो भी खूबियॉ हैं सब वालिद साहब की  देन है
  उनसे हमने सीखा है हर हालात का डट कर सामना करना
  मेहनत से पीछे ना हटना , अपने हर फर्ज़ को पूरा करना ।
  वालिद साहब के पास कोई सुख सुविधाये नहीं थी बावजूद इसके उन्होने खुद भी पढ़ा और अपने भाई बहनो को भी पढ़ाया । अपने बच्चों को भी नेक अमल की हिदायत दी और तालीम को अव्वल बताया ।
  अपने वालिद जैसा  शक्स मैने आज तक नही देखा ।
  खूबियों से भरे थे मेरे वालिद साहब।जिन्होने कभी हार मानना नहीं सीखा । वे  ही मेरी पसंदीदा हीरों हैं   I


हुमा अंसारी