दोस्तों के बिना जिन्दगी अधुरी,
बेजान, बेमक़सद, नीरस सी धुरी,
आती हैं जब यादें पुरानी
अच्छा लगता है,,,,
वो दोस्तों संग हंसना खिलखिलाना
रूठना मनाना, गिले शिकवे मिटाना
गड्डे गुड़िया का ब्याह रचाना,
एक दूसरे के घर जाना
छत पर, खुले आसमान के नीचे
जमाने भर की बातें बतियाना,
बर्थडे मनाना, सब मिलकर
तोहफा खरीदने जाना,
स्टुडियो में फोटो खिचवाना
सरवती पूजा पर सजना सजाना
मिट्टी छूकर दोस्ती निभाने की
कसमें खाना
स्कूल की मस्ती, स्वछन्द बस्ती
बारिश में भीगकर घर आना
कैन्टीन में सब साथ बैठकर
समोसे खाना,
वो फुच्के का तीखा पानी
ना है वो स्वाद अब पांच सितारा में भी
जो दोस्तों संग गुजरे जमाने में रही
टिफ़िन चुराकर हक्क से
खाली कर जाना
स्वतन्त्रता दिवस पर रास्ट्रीय गान गाना
हार्मोनियम बजाना
प्रतियोगीता जीत कर आना
थे टीचर की आंखों के तारे हम
माता पिता के राजदुलारे हम
इस उम्र की मस्ती जी लें हम
पर दोस्तों को ना भूले हम ।।
,,,,,,,डॉली मिश्रा "पल्लवि"✍️

0 टिप्पणियाँ