थींम : दर्द और दिखावा







दर्द क्या चीज है यह तो वही जाने भाई।
दर्द होता है तो कुछ भी ना अच्छा लागे।।

बस यही होता है प्रभु कैसे निजात मिले।
कैसे जल्दी से यह दर्द छोड़ हमको भागे।।

एक कहावत भी है वो क्या जाने पीर पराई।
जिसकी एड़ी में कभी फटी होती ना बेवाई।।

दिखावे का दर्द तो अंदर से ना होता है कोई।
कुछ छछन्द करते दिखाते हैं दर्द होता है कोई।।

आप यदि ध्यान से देखेंगें अगर उनको कभी।
बात करने में जब मशगूल हों तो आएगी हँसी।।

सोचिये आप खुदी क्या सच में दर्द ऐसा ही है।
ऐसे तो कोई दर्द नहीं केवल एक दिखावा ही है।।

बड़ा दर्द होता जब कोई कभी अपना खोता है।
कोरोना में कितनों ने खोया अपना दिल रोता है।।

ऐसे भी हैं आप को दर्द बाँटने का दिखावा करते।
सच यही है कि दर्द कोई दूसरे नहीं हैं सह सकते।।

अपने हर दर्द खुद को ही सदा ये सहना पड़ता है।
आ के दरवाजे भले कोई स्वयं दिखावा करता है।।

दर्द और दिखावा में बहुत बड़ा अंतर होता यारों।
दर्द अंतर्मन से होता दिखावे तो हैं ऊपर से यारों।।

किसी समाज में देखें तो अनगिनत भरे चेहरे हैं।
आप के दुःख दर्द में आयेंगें दिखावे के मोहरे हैं।।

राजनीति में नेता को ये कहीं भी देखें तो पायेंगें।
आप के दर्द में ये मखमली आँसू बहा के जायेंगें।।


रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव