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जितने भी खुशियाँ थीं मेरी ज़िन्दगी की
वो जाने कब और कहाँ खो गए
गम मिला ज़िन्दगी में मुझे इतना की
ये ज़िन्दगी तन्हाईयो के होके रह गए.....!!
जितने भी खुशियाँ थीं मेरी ज़िन्दगी की
वो जाने कब और कहाँ खो गए
आँसू मिल ज़िन्दगी में मुझे इतना की
ये आँखे कभी मुस्कुराना ही भूल गए.....!!
जितने भी खुशियाँ थीं मेरी ज़िन्दगी की
वो जाने कब और कहाँ खो गए
दर्द मिला ज़िन्दगी में दिल में इतना की
ये दिल के धड़कन मेरा धड़कना ही भूल गए....!!
जितने भी खुशियाँ थीं मेरी ज़िन्दगी की
वो जाने कब और कहाँ खो गए
रूठा नींद मेरे आँखों से कुछ इस तरह की
इन आँखों को अब रात को सोने से भी नफ़रत होगए...!!
जितने भी खुशियाँ थीं मेरी ज़िन्दगी की
वो जाने कब और कहाँ खो गए
टुटा हर तराना दिल के कुछ इस तरह चाहत की
नैना के हर लफ्ज़ दर्द भरी गज़लो की मोहताज हो गए...!!
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नैना....✍️✍️

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