मैं आऊंगा लौटकर मां,
बस मुझे पहचान लेना,
तेरी दर्द भरी आंखों को देख कर,
मेरा दिल तड़पता है पर असमय चला जाऊंगा मुझे नहीं पता था
कोरोना महामारी में लाखों मां की गोद सूनी हो गई मैं वापस आऊंगा
बस आप पहचान लेना,
माता पिता के बुढापे का सहारा था मैं
पर नियति का मुझे पता नहीं मैं चला जाऊंगा, मां की ममता की आंचल बिछाए रखना बस आप पहचान लेना, लौटकर फिर आऊंगा
तेरी बेबसी को देखा मैंने,
बुढ़ापा का सहारा था मैं
अपने बच्चों का मां पिता तेरे ऊपर दे
रहा मैं ,अपने लाल को दुनिया से अलविदा कर दो इस महामारी में किसका बस चला है, मैं वापस लौट कर आऊंगा बस आप मुझे पहचान लेना पत्नी की आंखों में दर्द देखा मैंने
उसे प्यार से समझा देना मैं वापस आऊंगा मुझे प्यार से अलविदा कर दो तेरे आंसुओं का सैलाब मुझसे देखा नहीं जाता, आप खुश रहो आपके दुख देखा नहीं जाता,
मेरे बच्चों को अपने बेटे जैसा समझ कर ख्याल रखना आप का सहारा तो ना बन पाया पर अगले जन्म में आपका सहारा जरूर बनूंगा
मैं वापस फिर आऊंगा
आप भूल मत जाना
अगले जन्म में फिर मिलेंगे
आप पहचानने मे भूल मत करना
मैं वापस फिर आऊंगा
बहु तेरा सहारा बने बेटी की तरह सम्मान देना मेरे जाने के बाद
मां उसे घर से निकाल मत देना
भाभी उसे बहनों की तरह लाड करना
संपत्ति से बेदखल मत कर देना
मां फिर मैं आऊंगा करोनो पर किसका बस चला है मुझे पहचान लेना मैं फिर आऊंगा
मुझे खुशी खुशी अलविदा कर दो
आपकी बेचैनी और सुनी आंखों
मुझे ऊपर भी शांति से जीने नहीं देगी
अगले जन्म में आपका सहारा बनूंगा
मैं वापस फिर आऊंगा आपकी गोद
मैं बैठकर फिर आपके बाल को खींच लूंगा
शरारत करके परेशान करने पर आप परेशान मत होना
मैं वापस फिर आऊंगा आप पहचान लेना
सपना कुमारी जहानाबाद बिहार

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