सब कुछ मिट्टी से है जन्मा मिट्टी में ही अंत।
मिट्टी का अस्तित्व, कहानी दोनों ही अनंत।।

जिनसे कांपती थी धरा वह भी मिट्टी में मिल गए।
मिट्टी में बीज के कारत सुगंधित पुष्प खिल गए।।

मिट्टी ने जीवन दिया, जीवन को महकाया।
नए-नए जीवो को मिट्टी ने ही चहकाया।।

मिट्टी ही सर्जन करे मिट्टी से होता विध्वंस।
मिट्टी का अस्तित्व, कहानी दोनों ही अनंत।।

मिट्टी पूर्ण जीवन के सर्जन का आधार बना।
इसी धरा पर मिट्टी से ही जीवन फूला फला।।

मिट्टी कई रूप दिखाएं समय-समय पर प्यारे।
मिट्टी के कईं खेल देखे अलग-अलग व न्यारे।।

जो अपना गुरुर दिखाएं मिट्टी में विलीन तुरंत।
मिट्टी का अस्तित्व, कहानी दोनों ही अनन्त।। 

नाम - विक्रांत चम्बली
पता - ग्वालियर (मध्य प्रदेश)