रविश का छोटा भाई और बाकी सब कैटर्स को फोन करते हैं हुए खाने की पूरी चीजें और स्टेज की सजावट वगैरह को तय कर लेते हैं और वहां जाकर सब काम अपनी आँखों के सामने करवा रहे होते है । लड़कियां पार्टी में क्या पहने और क्या नहीं ये सोच रही होती हैं । सरोज अपनी जेठानी से - दीदी देखो ना , तीन बज रहे हैं । कितना काम है करने को और ये लड़कियां भी ना हाथ धरे बैठी रहती हैं । रानी जा बेटा , भाभी को अपने कमरे में ले जा । वहां वो थोड़ा आराम कर लेगी । उसके बाद तुम मेरे कमरे में आना । मेहमानों को देने के लिए उपहार की पैकिंग करना है समझी । " जी मां " रानी ने कहा । सरोज के कमरे में उसकी जेठानी और छोटी बहू बैठे है ।
सरोज - दीदी , आज रविश
की जिंदगी में उसकी खुशियों ने कदम रखा है । मैं चाहता हूं कि उसे जिंदगी में वो हर खुशी मिले जिसके वो काबिल हैं ।
पीहू - मां , आप फिक्र मत करिए । भैया के साथ सब अच्छा होगा। पीहू , प्रशांत को फोन करती हैं । उधर प्रशांत रिसेप्शन में स्टेज पर सजावट के लिए आये लोगों को समझा रहा था कि स्टेज पूरी लाल गुलाब के फूलों से सजाना है और बीच - बीच में सफेद गुलाब भी होने चाहिए । तभी प्रशांत का मोबाइल बजने लगता है । प्रशांत ने देखा तो पीहू का फोन था।
प्रशांत - हां पीहू बोलो !
पीहू - घर से निकलते वक्त मैंने कुछ कहा था! वो काम हो गया क्या !
प्रशांत - अरे यार , मैं तो भूल ही गया। मैं अभी फोन कर के उसे बोलता हूं। वो तुम्हें सामान दे जायेंगे। तुम उनसे सामान ले लेना ठीक है ।
पीहू - ठीक है, मैं उनसे सामान ले लुंगी। कहकर फोन काट देती है। सरोज जी - पीहू , तुम ये क्या कह रही थी प्रशांत से । पीहू मुस्कराते हुए - मां, ये सरप्राइज हैं दीदी और जीजा जी के लिए । सरोज कुछ और पूछती उससे पहले पीहू ने बात बदल दी। हे भगवान , मांजी देखो ना कितना टाइम हो गया है । 5 बज रहे है मै और रानी दी , स्वाति दीदी को पालर्र ले जाने वाले थे। हम तीनों वहीं से तैयार होकर आ जायेंगी ।
सरोज जी - पीहू सुन , स्वाति से कहना की शिवांश को मेरे पास छोड़ दें । मैंने शिवांश के लिए रिसेप्शन में पहनने के लिए कपड़े लिए हैं। तो मैं शिवांश को सीधे रिसेप्शन की जगह ले आऊंगी ।
सरोज जी - बेटा, ज्यादा देर मत करना। पार्टी 8 बजे शुरू हो जायेगी । तो सब जल्दी आ जाना। समझी!
पीहू - ठीक है मां।

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