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कोई कहानी कोई किस्सा नहीं
हकीकत है ये एहसासों की
वो अनकहे प्यार की खूबसूरती
जो होती बयां लफ्जों से नहीं
उसकी एक झलक दिखा सकूं अपनी कविता में
बस आशा है इतनी
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कि वह पल मुझे आज भी याद है!
जब खबर तेरे आने की हुई थी!!
सच कहती हूं कभी सोचा ना था,,
तेरे रूप रंग की काया,
मन में अभी कोई तस्वीर भी ना बनाया था !
पर फिर भी उस पल में न जाने
कितने एहसास उमड़े थे!
तेरे आने की तुझे पाने की
खुशी इतनी थी ,
एक पल में मानो सदियां बीत गए थे!
संभाले संभलती न थी वो खुशी,,
पर धीरे-धीरे पल बिता दिन बिता,,
और वो एहसास और गहरे होते गए!
तुझे खुद में महसूस करने लगी थी!!
अब मैं तेरी काया अपने मन में गड़ने लगी थी!!
और उस दिन जब तुमने
अपने नन्हे पैरों से हल्की सी लात मारी थी,,
वो पल भी याद है मैं कितनी चौक पड़ी थी!
मोनो एकाएक मेरे हृदय में
प्रसन्नता की हजार लहरें दौड़ पड़ी थी!!
मुझे यकीन है तुम भी सुनते थे,,
जो मैं अकेले में तुमसे हजारों बातें किया करती थी!
सोचती क्या ऐसा भी कुछ होता है,,
मन एहसासों और जज्बातों से भर जाता है!!
देखा नहीं पर उस प्यार को महसूस करने लगी थी!
तुझपे अपनी जान से ज्यादा मरने लगी थी!!
ना उन पलों में कहने सुनने को लब्ज़ थे,,
अनकहा प्यार ही था!
जो बस एहसासों की डोरी में बंधा था!
सच वो अनकहे प्यार का रिश्ता,,
कल्पना से परे था!!
दिनों के साथ अब महीने बीते
और वह पल भी आया,,
जब मैंने अपनी कल्पनाओं का साकार रूप पाया!!
पहली बार तुझे अपनी बाहों में ले कर,,
दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास पाया!!
अपने अनकहे प्यार को मां होने के एहसास में सजाया!!
अपने अनकहे प्यार को मां होने के एहसास में सजाया!!
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रचनाकार:- प्रांशु गुप्ता
(रायगढ़ छत्तीसगढ़)
( स्वरचित अप्रकाशित मौलिक रचना )

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