आजा मोहन तुझे आना होगा,
मीरा का मान बढ़ाना होगा।

तेरी आस में आज बैठी कितनी अबला ,
बनके  सांवरा उनका चीर बढ़ाना होगा।
हर तरफ फैला ताप कलह का,
फिर से मन मे बैठे विषधर को
 मार भगाना होगा।

  आज भी तेरी वाट जोहती,
 कदम की वो डाली ,
आकर फिर से तुझको चीर चुराना होगा।

वन उपवन सब सूने,
 ब्रज के ही नही वंशी धर,
तुझे सारे  जग में फिर,
रास रचाना होगा।

 आजा आजा ओ रे वनबारी,
ओ कान्हा ओ कृष्ण मुरारी ,
राधा बैठी लेके माखन ,
तुझको खाना होगा।

 फिर से फैली मोह माया,
अपना अपना सबको भाया,
कर्म विमुख हो रहे पार्थ,
तुझे फिर से गीता सुनाना होगा।

आजा मोहन तुझे  आना होगा।

अन्जू दीक्षित
उत्तर प्रदेश।