मैं छोटी बहना हूं भैया,
सदा साथ में रहना।
बहन पराया धन होती है,
कभी नहीं यह कहना।
बचपन से हम संग-संग खेले,
सारे दुख सुख संग में झेले।
बड़े हुए तो समझ में आया,
इस दुनिया में बड़े झमेले।
मैंने बोल दिया है पति को,
भाभी को भी समझाना।
हम भाई बहनों के बीच में,
तुम बस कभी ना आना।
नहीं चाहिए धन-दौलत,
ना देना कोई संपत्ति।
अपने माता-पिता के ऊपर,
आए ना कोई विपत्ति।
फूलों-फलो दिनों दिन भैया,
सदा रहो खुशहाल।
अपने कर्मों से इस कुल का,
ऊँचा रखना भाल।
प्रीति मनीष दुबे
मण्डला(म.प्र)

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