गतांक से आगे 👇


राहुल को पहले छुट्टी तों नहीं मिली लेकिन इतना आश्वासन जरूर दिया गया कि चार दिनों तक सीमा के पूर्वर्ती क्षेत्रों में  चलने वाले सर्च ऑपरेशन में से आते ही उसे छुट्टी पर भेजा जाएगा । 

राहुल बहुत खुश था । अगले दिन ही  उसे सर्च ऑपरेशन वाली टीम के साथ निकलना था । उसने पूरी तैयारी कर ली थी । अब उसे अपनी मृणाल जी से बात करनी थी और उनसे सर्च ऑपरेशन के बारे में बताना था साथ ही सबसे जरूरी बात उनके स्वास्थ्य और नन्ही परी के बारे में बातें करनी थी । 

राहुल ने घंटे भर फोन पर मृणाल से बातें की । विडियो काॅलिंग कर अपनी नन्ही परी का चेहरा भी देखा । ऑपरेशन से नन्ही परी इस दुनिया में आई थी इस कारण मृणाल अभी भी अस्पताल में ही थी । 

मृणाल को अस्पताल में अभी  छ: दिन और रहना था । राहुल की भाभी खाना बनाकर अपनी देवरानी के पास नियम से रोज पहुॅंच जाती ... दिन भर उसके और नन्ही परी के पास रहती और शाम में अपने ससुर के जातें ही वापस लौट आती । 


बेटी का जन्म होने से राहुल के परिवार  में खुशी का माहौल नहीं था हालांकि राहुल की पहली संतान होने की वजह से उसके भाई - भाभी और पिता खुश थे लेकिन नन्ही परी की दादी खुश नहीं थी । परिवार में कोई दुखी हो तों खुशियां मनाने की हिम्मत सबमें नहीं होती हैं । 

राहुल और उसकी बीस सदस्यीय टीम की मिशन ऑपरेशन पर जाने की पूरी तैयारियां हों चुकी थी । कमांडिंग ऑफिसर ने मिशन ऑपरेशन की टीम को जरूरी एहतियातों के साथ ऑपरेशन में भाग लेने वाले सैनिकों को उनके ऑपरेशन के बारे में ब्रीफ़ किया । 

सेना की वर्दी किसी भी सैनिक के लिए उसकी आन, बान और शान होती है । उसके माथे पर लगा अशोक स्तंभ हर सैनिक के सिर का ताज होती है जो उसे हर वक्त अपने देश के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाती रहती है। सैनिकों की यह वर्दी ही होती हैं तो उनमें एक ऐसा जोश भरती है जिससे वें अपने देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने में भी पीछे नहीं हटते हैं । 

मिशन ऑपरेशन में जाने वाले सैनिकों के जय हिन्द के उद्घोष से कैंट का पूरा वातावरण गुंजायमान हों उठा । सारे सैनिकों को इसी जोश और होश के साथ अपने कर्तव्य पथ की राह पर बढ़ना था और सीमावर्ती क्षेत्र में घुसे आतंकवादियों को ढूंढ कर उनके अंजाम तक पहुॅंचाना था । 

एक सैनिक के कर्तव्य पथ पर जाने से पहले राहुल को गृहस्थ जीवन के कर्तव्यों का भी निर्वहन करना था । उसने कैंट छोड़ने से पहले अपनी नाराज माॅं को मनाने के लिए फोन लगाया । एक बार में फोन नहीं उठाया गया तों मुस्कुराते हुए राहुल ने दूसरी बार फोन किया । बेटे के प्रति माॅं का स्नेह , लाड़ - प्यार का ही असर था कि राहुल की इच्छा पूरी हुई । 


अधिक वक्त ना होते हुए माॅं की सारी बातें राहुल ने सुनी । उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश की .. माॅं ने दिल खोल कर उस दिन बेटे के सामने रख दिया .. बेटे ने भी माॅं के पक्ष को समझने का प्रयास किया । अपनी सारी भड़ास निकालने के बाद राहुल की माॅं को बेटे का ख्याल आया .. राहुल ने मिशन ऑपरेशन पर जाने की बात माॅं को बताई साथ ही यह भी कहा कि मिशन से आते ही वह उनके पास होगा और उनकी सारी  समस्याओं के निराकरण करने का प्रयास करेगा । 

कैंट से निकलने में पाॅंच मिनट ही बाकी है ... घड़ी पर नज़र डालते हुए राहुल ने खुद से कहा । 
मृणाल जी और नन्ही परी को जाने से पहले एक बार देख लूं तो दिल को सुकून मिल जाएगा ... ना जाने वहाॅं पर नेटवर्क हों या ना हो ... समय भी हों सकता है ना मिले .. सोचते हुए राहुल ने मृणाल के फोन पर विडियो काॅल की । 

निर्धारित वक्त में जितनी बातें संभव हो सकती थी .. राहुल ने की और अपने रूम पार्टनर राज के आवाज देने पर मृणाल और नन्ही परी को बाय कहते हुए फोन रख दिया । राहुल को अचानक से कुछ याद आया .... मैंने पापा और भैया - भाभी का आशीर्वाद तों लिया ही नहीं ... गाड़ी में बैठ कर उसने पापा को फोन लगाया और साथ ही अपने बड़े भाई को भी चरणस्पर्श किया .. भाभी से बात नहीं हों पाई क्योंकि वह अस्पताल जाने के लिए निकल चुकी थी। 

राहुल के दिल में गृहस्थ कर्तव्यों में से एक छोटे से कर्तव्य को सफलतापूर्वक निभाने की खुशी थी जों उसकी ऑंखो में झलक रही थी । उसने अपने मिशन ऑपरेशन में जाने और लौट कर छुट्टी आने वाली बात सबको बता दी थी । सबकी ख़ुशी देखकर वह भी खुश था और ऑंखों को बंद किए मुस्कुराएं ही जा रहा था । 

रूम पार्टनर राज ने राहुल की हालत का बखूबी इस्तेमाल किया ... मृणाल से उसकी शादी को लव स्टोरी की तर्ज पर बताते हुए राज ने खूब वाहवाही लूटी । राज ने राहुल को भी इनमें खींच लिया और दोनों ने मिलकर अब तक की अपनी सारी फीलिंग्स अपने साथी सैनिकों को मनोरंजन के लिए सुना डाला । फौजी ही तो होते है जों किसी भी परिस्थिति में अपने आप को खुश रखने का कारण ढूंढ ही लेते हैं।


मिशन ऑपरेशन पर जाने वाले हर एक फौजी के दिल में यह बात तों जरूर आई थी कि शायद इस मिशन से मैं  जिंदा लौट कर वापस अपने कैंट में ना आ सकूं ... अपने  मन  में  उठ रहें   नकारात्मक ऊर्जा  को  वही पर  दबा  कर  सभी सैनिक खुश‌ थे और  अपने - अपने  तरीके  से  मनोरंजन भी 
कर रहे  थे । 


मिशन ऑपरेशन को लीड कर रहे सेकेंड इन कमांड ( टू आई सी ) की रणनीति थी कि इस पूरी मुहिम को रात के अंधेरे में अंजाम दिया जाए । ठीक चार दिन बाद रात के ग्यारह बजे के आस-पास सामने से हमला बोलने का प्लान बनाया गया क्योंकि उस दिन और भी आतंकवादियों के उस घर में एक साथ होने की खबर लोकल पुलिस द्वारा उन्हें दी गई थी । 


जैसा कि राहुल को अंदेशा था.. नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ रहा था । मिशन पर आएं हुए चार दिन बीत चुके थे ... इन चार दिनों में राहुल की अपने परिवार और मृणाल से दो - तीन बार ही मुश्किल से बात हो पाई थी ऐसे में वीडियो काॅल पर अपनी नन्ही परी को देखने की तमन्ना राहुल के दिल में ही रह जाती । 


मृणाल अब अस्पताल से घर लौट चुकी थी । नन्ही परी अपने दादा-दादी के घर में आ गई थी लेकिन अपने साथ इस घर  में खुशियां वह नहीं ला पाई थी और इसकी सबसे बड़ी वजह उसका लड़की होना था । 


निर्धारित तारीख और दिन को  वर्दी पहने मिशन ऑपरेशन के सभी सैनिकों को निर्देश दिया गया कि वह घर की तरफ़ बढ़ें । कुछ सैनिक दाहिने मुड़ें और जितनी जल्दी संभव हो सके उस घर के कमरें की ओर कदम बढ़ाएं लेकिन जैसे ही सैनिक आगे बढ़े उन  पर दोनों तरफ़  से ऑटोमैटिक हथियारों से ज़बरदस्त गोलीबारी की जानें लगी । कुछ ही  सैनिक इस जवाबी हमले में बच पाएं ।  पीछे की बैक अप टीम ने मोर्चा संभाला और घर के सारे आतंकवादियों को अपने आधुनिक हथियारों से चंद ही मिनटों में धारासायी कर दिया । 

सेना की यह सैनिक जीत ज़रूर थी लेकिन इस जीत में सेना ने अपने दस वीर और जांबाज देशभक्त सैनिक को खो दिया था । शहीद होने वाले लिस्ट में कांस्टेबल राहुल सिन्हा का भी नाम था । 

पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीदों को कैंट में लाया गया । सेना के सभी वरिष्ठ अधिकारियों और समस्त सैनिकों के सामने दसों शहीद सैनिकों को तिरंगे और तोपों की सलामी देकर उनको देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपनी जान की कुर्बानी देने के लिए नमन किया गया । 


राहुल का रूम पार्टनर राज उस हमलें में बाल - बाल बचा था । उसे अपने साथी सैनिक के जाने का दुख इस कदर था कि वह राहुल के परिवार वालों को यह दुखद और असहनीय सूचना को देने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहा था । कैसे .. वह एक माॅं - बाप से कहेगा कि आपके बेटे को और अपने साथी को हम दुश्मनों की गोली से नहीं बचा पाए ... कैसे एक भाई को वह कहेगा कि उसका छोटा भाई इस दुनिया से चला गया ... कैसे वह एक पत्नी को कह सकता है कि अब वह अपने पति के आने का इंतजार करना बंद कर दें क्योंकि अब वह पहले की तरह उसके पास नहीं आ सकता .. कैसे नन्ही परी को कहूं कि वह अपने पिता को सिर्फ तस्वीरों में ही देख पाएगी... 
कैसे .... कैसे ... राज जोर - जोर से रोने लगा । 


यह खबर तों कैसे भी करके राहुल के परिवार को तों देनी ही होगी .... कहते हुए एक दूसरे सिपाही द्वारा राज को जमीन से उठाकर उसके बिस्तर पर बैठाया गया । एक फौजी को कैसी भी परिस्थिति हों उससे निकल कर अपनी ड्यूटी तों निभानी ही पड़ती है ... राज ने अपनी ड्यूटी निभाई और राहुल के फोन से उसके पिता को काॅल किया । 


फोन में राहुल नाम दिखते ही सभी के चेहरे खिल उठे .. कल शाम से ही स्विच ऑफ कह रहें फोन से फोन आना परिवार के लोगों के लिए खुशी की बात थी । राहुल के पिता ने फोन उठाया और उठाते ही अपने बेटे को शाबाशी देते हुए कहने लगे - " मैं जानता था मेरा शेर बेटा मिशन ऑपरेशन सफल होते ही सबसे पहला काॅल मुझे ही करेगा और देख तुने मुझे ही किया । तेरी माॅं मुझसे जल रही है देख ! 

अंकल जी ! मैं राज .... राहुल का रूम पार्टनर ... 

अच्छा ... अच्छा ... उसने तुम्हें फोन पकड़ा दिया और खुद किसी काम से कहीं चला गया हैं ... राहुल के पिता ने कहा । 

हाॅं अंकल जी ! राहुल .. हम सब को छोड़कर इतनी दूर चला गया है कि कभी भी वापस लौट कर नहीं आ पाएगा ... कहते हुए राज रोने लगा । 

राहुल के पिता के हाथों से फोन गिर चुका था ... परिवार के सभी सदस्यों के चेहरे आश्चर्य था .. राहुल का फोन हैं सुनकर सभी एक ही कमरे में इकट्ठे हो गए थे .. मृणाल भी अपने कमरे से उठकर आ चुकी थी और दरवाजे के पास खड़ी थी ... राहुल और मृणाल की नन्ही परी पालने में सो रही थी । 

क्या हुआ ?? फोन कैसे गिर गया ?? फोन पर राहुल नहीं था तों कौन था और उसने क्या कहा ?? राहुल की माॅं ने अपने पति को झकझोरते हुए कहा । 

हमारा बेटा .... इतना कहते ही राहुल के पिता रोने लगे । 

क्या हमारा बेटा ?? आगे भी तों कुछ कहिए ... राहुल की माॅं ने घबराकर कहा । 

हमारा बेटा हम सबको छोड़ कर चला गया ... शहीद हो गया वह ... कहते ही राहुल के पिता निढ़ाल होकर जमीन पर गिर पड़े । 


क्रमशः 


" गुॅंजन कमल " 💓💞💗