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आओ मनाए भाई बहन का प्यार
आओ मनाए रक्षाबंधन का त्योहार
आओ मिलकर कसमें खाये
देश के हर बहनों का इज्जत बचाए
उनको हर जगह सम्मान दिलाए
अपने किए वादे को निभाये
आओ मनाए भाई बहन का प्यार
आओ मनाए रक्षाबंधन का त्योहार
बड़ी हो तो मां-बाप से बचाती है
छोटी हो तो हमारे पिछे छुप जाती है
बड़ी हो तो चुपचाप हमारे पौकेट में पैसा रख देती है
छोटी हो तो चुपचाप पैसा निकाल लेती है
बहन जैसी ना कोई हमदर्द होती है
ना कोई कोई शुभचिंतक होती हैं
ना कोई सताने वाली होती है
ना कोई मनाने वाली होती है
सबसे प्यारी सबसे न्यारी
हमारी बहना होती है
आओ मनाए भाई बहन का प्यार
आओ मनाए रक्षाबंधन का त्योहार
बहन के विदाई के दिन
हर दिल रो देता है
गुज़रे लम्हों को याद कर
बेसुध सा हो जाता है
सिने पर पत्थर रखकर
डोली तक छोड़ आता है
आओ मनाए भाई बहन
का प्यार
आओ मनाए रक्षाबंधन का त्योहार
स्वरचित कविता ✍️
अफ्फान हाजिपुरी
हाजिपुर वैशाली बिहार
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