करती हूं हर साल इंतजार....।
भैया मैं हूँ तुमसे दूर,
हूँ मैं थोड़ी सी मजबूर
बचपन की जो याद आए
राखी में आना जरूर......।
जब देखती हूं रंग बिरंगी राखी ,
प्यारी सी वह हमारी लड़ाई
याद बहुत आ रही भैया आज
मुझे तेरी कलाई
यादों की है सुखद पीड़
भर आया आँखों में नीर......।
तेरे आँगन की हूँ भैया,
मैं तो एक सोन चिरैया
जो रहते मेरे पंख रंग बिरंगी
राखी लिए उड़ सजाती मैं तेरी
कलाइयाँ.........।
नहीं चाहिए भैया मुझको,
सोने चाँदी का तोहफा
आज तुम्हें मुझसे करना होगा
एक वादा
जब भी कहीं हो द्रौपदी का अपमान
बन के कृष्ण तुम्हें वहाँ आना होगा......।
भेज रही मैं पवित्र डोर,
भाई बहन रिश्ते को जोड़
भैया बढ़े उम्र तुम्हारी
रक्षा करना तुम हमारी.........।
ऋचा कर्ण✍😊
❤❤रक्षाबंधन की बहुत शुभकामनाएं❤❤

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