आज मैंने "बच्चों" को सिखाई है , 
पकाना कच्ची पक्की रसोई, 
और सिखाया "जरूरत"  है, 
पर पहचान"  नहीं है तुम्हारी l  

आज मैंने बच्चों को सिखाया है ,  
सभी की सुनना और सहना,  
और सिखाया झुकना नहीं है,  
जरूरत हो तो जवाब भी देना l 

आज मैंने  बच्चों  को सिखाया है , 
सभी के आगे नजरों को झुकाना , 
और सिखाया कि सम्मान में है सही, 
पर गलत हो तो, नजरों को मिलाना  l  

आज मैंने बच्चों को सिखाया है, 
समझौते को करना और निभाना,   
और सिखाया कि बराबरी का है सही,  
पर इकतरफ़ा हो तो आगे बढ़ जाना l  

आज मैंने बच्चों को सिखाया है, 
रोज थोड़ा थोड़ा करके बचाना,
और सिखाया कि मन मारके नहीं,
पर थोड़ा अपनी खुशियों पर उड़ाना l

आज मैंने बच्चों को सिखाया है, 
सबकी छोटी छोटी खुशियाँ निभाना, 
और सिखाया कि सिर्फ देना है हमें , 
पर किसी से लेने की उम्मीद मत लगाना l 

आज मैंने बच्चों को सिखाया है ,
सबके कदमों से कदम मिलाना, 
और सिखाया, कुछ करना ना ऐसा,
कि पड़ जाए  तुम पर उँगली उठाना l 

शालिनी गुप्ता प्रेमकमल 🌸
(स्वरचित)