आज बारिश तो लगता है थमने वाली नहीं है , घड़ी _घड़ी बिजली चमक कर डरा रही थी ।बारिश के चक्कर में ऑफिस से निकलने में देर हो गई थी। यही बारिश किसी के लिए प्रणय संदेश है,किसी के लिए दुखदायी,आज घर पर होता तो ये बारिश ,नेहा के साथ रोमांस और चाय पकौड़ों का मजा दिलाती लेकिन यहां फंस कर बारिश का सारा मजा किरकिरा हो रहा,उसपर से नेहा का बार बार फोन बड़बड़ाते हुए ,कार की रफ्तार तेज कर दी ,विशाल ने।
अचानक , गाड़ी में ब्रेक लगाना पड़ा,सामने एक महिला ,अभी गाड़ी के नीचे आती आती बची।
विशाल को बहुत गुस्सा आ रहा था,वह कार से नीचे उतरा ,और बिजली की आवाजाही के बीच में एक जानी पहचानी आकृति देख कर चौंक गया।
मैडम आप !!!!
इतनी रात को अकेली।
महिला ने विशाल को उसी बिजली की रोशनी में देखा ।
विशाल !!प्लीज मुझे बचा लीजिए।
स्नेहा मैडम की हालत देख विशाल ने कहा _,आइए घर चल कर बात करते हैं,क्योंकि बारिश तेज थी,और पीछे वाली गाड़ियां लगातार हॉर्न बजा रहीं थी।
विशाल ने जल्दी से उनका हाथ पकड़ा ,और कार में बिठा दिया।
रास्ते भर में स्नेहा मैडम के बारे में ही सोचता रहा ,अनगिनत सवाल सांप की तरह फन निकाले विशाल को घेरे थे,लेकिन विशाल पूरी तरह शांत था।
कार में बैठ स्नेहा भी ठीक हो गईं थी,विशाल ने चोरी से उनके चेहरे पर निगाह डाली एक राहत और तसल्ली का भाव उनके चेहरे पर आ जा रहा था।
घर पहुंचा तो ,दोनों लोग भींगे थे।नेहा ने सवाल भरी दृष्टि से विशाल को देखा ,पर कुछ बोली नहीं।
उसने चुपचाप स्नेहा मैडम को टॉवल दिया और अपने कुछ कपड़े ,वो काफी भीग गईं थी,वो शावर लेने बाथरूम में चली गईं।
और नेहा उनलोगों के लिए चाय बनाने चली गई।
विशाल भी पीछे पीछे आ गया।
विशाल ने पीछे से प्यार से नेहा को पकड़ लिया।नेहा गुस्से से पहले ही भरी थी ,लेकिन किसी अपरिचित के सामने उसने अपने गुस्से को कंट्रोल किया हुआ था,विशाल के छूते ही वह गुस्से से फट पड़ी।
क्या है,ये सब ,कौन है ये? नेहा ने गुस्से से कहा।
धीरे नेहा धीरे,_ विशाल ने उसके मुंह पर उंगली रखते कहा।
बस अभी इतना जान लो , कि ये मैं पहले जिस कंपनी में काम करता था,उसके बॉस की पत्नी हैं।
इस समय इतनी रात अकेली इस हाल में कैसे ?ये तो वही बता सकती हैं,।पहले उन्हें सामान्य होने दो ,फिर धीरे धीरे पूछना ,हो सके वो तुम्हें बताने में ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करें।
नेहा ने फिर कुछ नहीं कहा ।उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि ,वो बात को समझ रही।
स्नेहा अभी भी परेशान थी ,नेहा उसके करीब आई उसने पूछा_ क्या हुआ?
आप मुझे अपनी परेशानी बताइए, हो सके मैं आपकी कोई मदद कर सकूं।
मैं स्वयंसेवी संस्था चलाती हूं।
मिसेज विशाल मैं बहुत मुसीबत में हूं।मैं पुलिस के पास भी गई थी,लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हुई ,मेरे पति और जेठ की पहुंच बहुत ऊंचे तक है, इसलिए कोई उन पर हाथ भी नहीं डाल सकता ।
उन्होंने मुझे पकड़ने के लिए,मेरे पीछे गुंडे छोड़ रखे हैं, मैं छुप कर एक छोटे से घर में रह रही थी,आज नमक लेने मैं निकली ही थी,मूसलाधार बारिश शुरू हो गई इससे मैं वहीं दुकान पर ही रुक गई।
तभी मुझे ढूंढने निकले सलिल के गुंडों की नजर मुझपर पड़ गई ,और उन्होंने मेरा पीछा किया, मैं उनसे बचने को भागी,शुक्र है भगवान का कि मैं विशाल की ही कार से टकरा गई।_स्नेहा इतना बोल कर रुक गई।
आप प्लीज मुझे नेहा ही कहिए ,और पूरी बात विस्तार से बताइए_नेहा ने कहा।
स्नेहा ने पूरी बात बताई।नेहा अगले दिन उसे लेकर पुलिस स्टेशन गई ,वहां उनके साथ महिला मोर्चा की सदस्य भी गईं।मीडिया ,न्यूज चैनल को भी खबर कर दी गई।
आखिर दबाव में आकर एफआईआर पुलिस को एफआईआर लिखनी पड़ी।उसके बाद स्नेहा के पति और जेठ को गिरफ्तार कर लिया गया।
स्नेहा को नेहा अपने घर ले आई ।
नेहा ने देखा स्नेहा बहुत ही नम्र,सुशील और पढ़ी लिखी थी।
गुजरात की अनंत ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री, बहुत बड़ी कंपनी थी,उनका होटल,फार्मा ,घरों में डाली जाने वाली पाइप्स का कारोबार था।उनकी शहर में काफी इज्जत थी।
अगले दिन चटखारे लगा कर समाचार परोसा जाने लगा ,
ब्रेकिंग न्यूज
इतने बड़े बिजनेस ग्रुप के मालिक की बहू ने अपने पति और देवर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
बड़े घरानों के घरों में सुरक्षित नहीं हैं बहुएं।
वगैरह वगैरह।
सलिल ,स्नेहा का पति और स्नेहा दोनों कॉलेज में साथ पढ़ते थे।गरीब परिवार की स्नेहा,पिता गांव में खेती करते थे।
खेती से स्नेहा को कॉलेज की फीस और हॉस्टल का खर्च भेजा करते थे।
क्रमशः

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