भक्तों का सहारा रहूँगा, 
हमेशा बना किनारा रहूँगा।

पिता शिव से सीखा ज्ञान विज्ञान, 
माता पार्वती का दुलारा रहूँगा। 

मोदक मिष्ठान का भोग लगाए, 
भक्तों पर हृदय अपना हारा रहूँगा।

द्वेष विद्वेष से दूर रखे जो खुद को, 
पग पग पर देता साथ तुम्हारा रहूँगा।

पिता ने खुश हो दिया है आशीर्वाद ऐसा, 
प्रथम पूज्य जग की आँखों का तारा रहूँगा।
आरती झा(स्वरचित व मौलिक) 
दिल्ली 
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