जीवन है नृत्य
जीवन है लय
जीवन है भावों का इक गीत
इसके भावों से
और लय से
प्रेम की धुन तो बनाना सीख
पूरी होती जीवन की लय
मिलकर के कदम बढ़ाने से
बढ़ जायेंगे खुद ही ये कदम
प्रेम का गीत तो गाना सीख
मानों तो सभी अपनें हैं यहां
ना मानों तो अपनें भी हैं गैर
इस जीवन रूपी नृत्य को तू
प्रेम के सुर पे नाचना सीख
मन में रख के बस प्रेम भाव
द्वेष को परे हटाना सीख
बन जायेंगे सभी अपनें
बस अपना बनाना सीख
कविता गौतम✍️

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