उस वक्त थी मै इस प्रयोगशाला से अंजान
एक दिन मेरे ससुर जी ने दिया फरमान
बहुरानी कुछ खिलाओ चटक मटक
मैनै सोचा क्यो ना बनाया जाए मंचुरियन
मेरे घर मे सभी खानेवाले तीखा तीखा
मै बनाती थी सादा सादा
जेठ जी ने कहा अच्छे से मिर्च मसाला डालना
मैने कहा जो हुक्म मेरे भैया
मुझे भी नहीं था कोई अंदाज
मैनै भी डाल दिया अदरख हरी मिर्च जमकर
ऐसे तो हर दिन मेरे देवर जी
सबसे पहले खाने वाले
जो बता कर रसोई को सुधारवा देते थे
उस दिन सबके काम की छुट्टी थी
बैठे सब एकसाथ खाने खाना
खाते ही मुहँ और कान से निकल गया धुँआ,
मै बेचारी देख रही थी चुपचाप
उनके आँखो से बहता पानी
चेहरा लाल ,भागे तीनो भाई रसोईघर मे खाने गुड़
पापाजी ने कहा अब ना कहुँगा तुम्हें चटक मटक बनाने।
तीनो भाईयों ने कहा... अरे छोरी!!
आज तो तुमने खिलाकर मंचुरियन
हम सबका मन ही चुर डाला🤣🤣🤣🤣
शिल्पा मोदी

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