तुझे क्या कहूं गुरुवर
 भगवान कहूं या भाग्य विधाता 
मेरी बिगड़ी किस्मत तू ही बनाता
   अ,आ से लेकर वेद पुराण सब पढ़ाता
 नित नई अच्छी अच्छी बातें सिखाता
 बिन लालच के कर्तव्य निभाता    
     फर्श से अर्श तक ले जाता है 
सब पर अपना प्यार लुटाता
 कभी डांटता कभी पुकारता 
मेहनत से भाग्य सवारता
 अपनी मीठी मीठी बातों से
 दुख दर्द सब हर लेता 
मात-पिता के बाद तू ही 
हमारी चिंता करता 
विचलित कभी ना मन को होने  देता
 आत्मविश्वास ना हमारा खोने देता 
धन्यवाद तेरा मैं बारम्बार करता 
चरणों में कोटि कोटि प्रणाम करता ।।
.......@ नेहा धामा " विजेता " 
बागपत , उत्तर प्रदेश