अब पीहू की सास नीरज को फोन करती है और उसे रामायण लाने को कहती है।कौशल्या पीहू को कहती है बेटा तेरे लिए मैंने रामायण मंगवाई है,अब तू उसे पढ़ेगी तो तुझे बहुत राहत मिलेगी।सारी परेशानियां तुझसे खुद ही दूर भाग जाएंगी।

सामने खड़ी छाया भी ये सारी बात सुन रही थी।उसे रामायण का नाम सुनकर इतना गुस्सा आता है कि वो कौशल्या को गर्दन से पकड़ लेती है।कौशल्या को कुछ भी दिखाई नही दे रहा है लेकिन ये महसूस जरूर हो रहा है कि कोई उसकी गर्दन दबा रहा है।

अब पीहू छाया के आगे गिड़गिड़ाने लगती है छोड़ दो माँ को,मैं नही पढूँगी रामायण।

अब काफी देर तक गिड़गिड़ाने के बाद वो कौशल्या को नीचे फेंककर चली जाती है और कौशल्या बहुत तेज धरती पे गिरती है।पीहू उठ कर अपनी सास को उठा कर बेड पर बिठाती है।अब वो पूछती है ये सब क्या हो रहा था मेरे साथ?

कुछ नही माँ बस आप इन बातों में  मत पढिये और वापिस चले जाइये,बस अपनी बेटी की इस प्रार्थना को मान लीजिए।

कौशल्या कुछ नही कहती बस खामोश सी बैठी रहती है लेकिन वो ये बात समझ चुकी है कि पीहू किसी बहुत बड़े शैतानी खतरे में है।अब वो दोपहर के समय घर से बाहर जाती है और पैदल चलते-चलते लोगों से पूछते हुए कि क्या यहाँ आसपास कोई मन्दिर है?घर से थोड़ी दूर स्थित हनुनान मंदिर पहुँच जाती है।वहाँ वो माथा टेक कर वहीं चिंता में बैठ जाती है कि तभी उसी मन्दिर के एक सबसे बुजुर्ग पुजारी वहाँ आते हैं।सूरत से वो 90-95 साल के लग रहे हैं।उनकी सफेद दाढ़ी बहुत बढ़ी हुई है और चेहरे पर झुर्रियां हैं।माथे पर लम्बा से केसरी रँग का तिलक है और गले मे बहुत बड़ा हनुमान जी का लॉकेट है।

वो कौशल्या को ऐसे बैठे हुए देखकर कहते हैं बेटी तू किसी परेशानी का हल खोजने आई है हनुमान जी के दरबार मे।बोल तुझे कैसी मदद चाहिए?

कौशल्या अब रोने लगती है और रोते-रोते सारी बात बता देती है।वो पुजारी आँखे बंद करके देखते हैं और थोड़ी ही देर में आँखे खोलकर देखते हुए कहते है बेटी तेरी बहु के ऊपर एक बहुत बड़ी चुड़ैल का साया है,जिसकी शक्तियाँ अपार है।पीहू को उसने पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में किया हुआ है।

तो आप मेरी मदद कीजिये नजे गुरुजी,कौशल्या कहती है।

ठीक है,मैं आज रात 8बजे तेरे घर आऊँगा और फिर बताऊँगा सारी बात!वो पुजारी कहता है।

अब कौशल्या उन्हें धन्यवाद करती है और पैर छूकर वहाँ से चली जाती है।

वो घर मे किसी से कुछ नही कहती तब छाया पीहू को कहती है इस बुढ़िया से पूछ कहाँ गई थी आज।

तब पीहू पूछती है कि माँ कहाँ गई थी आप?मुझे बहुत चिंता  हो रही थी।

कौशल्या कहती है बेटा मन बहुत परेशान था तो थोड़ा बाहर घूमने चली गई थी!ये कहकर वो दूसरे कमरे में चली जाती है आराम करने।

छाया का मन बहुत परेशान है क्योंकि वो जानती है कि आज गुस्से में उससे गलत काम हुआ है।उसे कौशल्या को गर्दन से नही पकड़ना चाहिए था।वो बुढ़िया बहुत तेज है इसीलिए जरूर समझ गई होगी सब!पता नही ये बुढ़िया अब कौनसा कदम उठाएगी?

पीहू भी आज बहुत परेशान है उसे लग रहा है कि अगर माँ यहाँ रही तो उनकी जान को बहुत बड़ा खतरा है।

इस तरह शाम हो जाती है और नीरज आफिस से वापिस आ जाता है।वो कौशल्या को रामायण देता है जिसे वो घर के मंदिर में रख देती है।अब नीरज पानी पीकर आराम से बैठ कर  टीवी देख रहा है।


रात के 8 बजे वो पुजारी आकर दरवाजे की घँटी बजाते हैं और कौशल्या जाकर दरवाजे को खोलती है।सामने पुजारी को देख कर वो बहुत खुश होती है और उन्हें सत्कार सहित अंदर लेकर आती है।छाया सब देख रही है,वो पुजारी को देखते ही क्रोध और डर से काँपने लगती है।

अब नीरज जब घर मे पूजारी को देखता है तो कौशल्या को एक तरफ ले जाकर पूछता है कि माँ ये कौन है और हमारे यहाँ क्यों आए हैं?

कौशल्या कहती है “अभी तू चुप कर बाद में सब समझ जाएगा”।नीरज भी अब खामोश हो जाता है।

वो पुजारी आँखे बंद करके बहुत देर तक ध्यान लगाकर वहीं सौफे पर बैठ जाता है।काफी देर बाद आँखे खोल कर कहता है वो आने वाला है।

कौशल्या कहती है कौन आने वाला है गुरुजी?

वही जिसे नही आना चाहिए था।उस चुड़ैल का बच्चा आने वाला है।वो पुजारी गम्भीर होकर कहता है।

अब पुजारी फिर से कहता है “अगर वो आ गया तो तबाही मचा देगा हर तरफ।"

गुरूजी आप पहेलियाँ मत बताएँ,हमे सच बताएं कि क्या बात है।


सच बहुत कड़वा और भयंकर है बेटी और सच ये है कि  तेरी बहु के गर्भ में  एक चुड़ैल का बच्चा पल रहा है।जिसे तू पोता मां रही है वो नीरज और तेरी बहु का नही बल्कि नीरज और चुड़ैल का बच्चा है।वो एक मनुष्य और एक चुड़ैल का अंश है।