शैव्या धाराप्रवाह  कहती जा रही थी।

अगले दिन रचित ,और मैं दोनों राकेश के क्लिनिक पहुंचे।रचित ,राकेश को देख खुश हुआ,और थोड़ी देर शिष्टाचार वस दोनों के बीच बातें हुईं ,उसके बाद रचित ऑफिस चला गया।
उसके स्टाफ मुझे घूर घूर कर देख रहे थे।

सबके सामने राकेश ने मुझसे कहा _कैसी हैं?
मैने कहा मेरी कमर में दर्द हो रहा।
उसकी क्लिनिक में फिजियोथेरेपी करवाने के लिए अलग अलग केबिन जैसे कमरे थे।
उसने  एक कमरे की तरफ इशारा किया और कहा _जाइए वहां लेट जाइए, मैं अभी आता हूं।

राकेश ने आज बहुत से पेशेंट का अपॉइंटमेंट कैंसल कर रखा था।
क्रिटिकल पेशेंट के घर  उसने अपने  अटेंडेंट को भेज दिया,जिससे एक्स्ट्रा पैसा और हमारा रास्ता भी साफ हो गया था।
और फिर केबिन में आया।

बहुत दिनों बाद हम मिले थे,हम बेताब थे एक होने को।
जिस्म की भूख तो मिटी  ,लेकिन इस तरह का मिलना कब तक !!ज्यादा से ज्यादा मैं 15 दिनों का बहाना कर सकती थी।

हमारे अंदर बहुत कुछ चल रहा था।राकेश अपने दिमाग के घोड़े दौड़ा रहा था ,और मैं अपने।
आखिर राकेश ने कहा _सुनो शैव्या तुम रचित से तलाक ले लो।
मैने उससे कहा _तुम्हें लगता है रचित मान जाएगा। ,क्या कारण दूंगी उससे तलाक लेने का।
और मेरे पिता उनके लिए तो रचित देवता है ,उससे दूर हुई तो पता नहीं उनकी क्या हालत होगी।
कोई  भी नहीं तैयार होगा।

तो फिर क्या करें?_हताश राकेश ने कहा।
कुछ तो करना पड़ेगा ,मुझे अब रचित के साथ नहीं रहना है ,और मैं  राकेश से लिपट कर रोने लगी।
राकेश बेबस था , मैंने तलाक के लिए मना कर दिया था ,तो और कोई  उपाय रह ही कहां गया था।

3,4 घंटे के रहने के  बाद मैं  घर लौट आई,और टीवी खोल कर लेट गई।
कुछ अच्छा नहीं लग रहा था ,नौकर खाना लेकर आया मैने मना कर दिया।
टीवी पर फिल्म आ रही थी,अचानक उसमें कुछ 
ऐसे सीन आए ,जिसने मेरे  दिमाग में एक योजना को जन्म देना शुरू कर दिया।

संजय इस कहानी को सुनकर सोचने लगा_
जीवन में कुछ पाना है तो उसके लिए कुछ लोग सीधा रास्ता अपनाते हैं तो कुछ उसे बहुत जटिल बना देते हैं ।
प्यार का मतलब पाना ही नहीं होता,प्यार की कोई सीमा नहीं होती ,ये असीमित है ,अगर पाना प्यार होता तो कृष्ण तो भगवान थे राधा को  पा ही सकते थे ,लेकिन फिर भी राधा का नाम रुक्मिणी से अधिक कृष्ण के साथ लिया जाता है,बल्कि उनका नाम ही पूरा होता है साथ साथ।
शैव्या बोलती जा रही थी_
उस फिल्म को देखने के बाद मेरी  आंखों में पाशविक चमक आ गई थी।

मैने तत्काल राकेश को फोन किया और अपनी योजना बनाई ।

राकेश को ये योजना बड़ी भयानक लगी ,लेकिन अंधे प्यार में उसकी भी  मति मारी गई थी ,उसने हामी भर दी।
मैं  खुश थी ,अब रचित से छुटकारा पाने का उपाय मिल चुका था।
शाम को रचित आया ,उसने मेरी  तबियत पूछी ?
मुझे याद ही नहीं नहीं था कि कमर दर्द का बहाना बना मैं कई दिनों से उससे  अलग ही  लेट रही थी , मैं  हड़बड़ा गई और बोली ,मेरी तबियत को क्या हुआ?
रचित ने कहा ,_ अरे! तुम्हारा दर्द?
ओह हां ,आराम मिला,डॉक्टर राकेश ने कहा है 15 दिन तक आना होगा।
हां चली जाना_बेपरवाह रचित ने कहा।

दिन में  मैने  खाना नहीं खाया था ,तो अब भूख लग रही थी ।हमदोनों ने खाना खाया ,और सो गए।

पर मेरी आंखों में नींद कहां थी ?मेरा  दिमाग बहुत तेज़ी से काम कर रहा था।

अगले दिन रचित ,राकेश के क्लिनिक मुझे  छोड़ कर ऑफिस चला गया।

अब आराम से मैंने सारी प्लानिंग समझाई,और राकेश को जो फिल्म मैने देखी थी ,देखने को भी कहा।

राकेश ने हामी भरी ।

रविवार का दिन  आया ,आज मैंने नौकर को छुट्टी दे दी थी।

रचित ने पूछा _आज क्या खाना तुम बमाओगी जो तुमने नौकर की छुट्टी कर दी।

तो मैंने रचित के गले में हाथ डालते हुए रोमांटिक अंदाज में  कहा _आज मेरा मन तुमसे फुल रोमांस का है ,पूरे घर में बस हमारी और तुम्हारी रोमांटिक यादें बसी हों।नौकर के रहने में तो एक कमरे में सिमटे रहो।

मैं चाहती हूं , मैं तुम्हारा कत्ल करूं,अपनी अदाओं से,अपने नयनों से।
रचित हंसने लगा आज तुम्हें क्या हो गया है,कत्ल तो तुमने मेरा बहुत पहले कर दिया ,तभी से तो मैं तुम्हारा हो गया।
आज क्या खाओगे ,तुम्हारे मनपसंद का खाना मैं बनाऊंगी मेरी जान आज मैं अपने  पूरे मूड में थी।
रचित को मेरा ये अंदाज बहुत अच्छा लग रहा था,इस तरह का रूप  उसने कम ही देखा था।

मैने उसकी पसंद का खाना बनाया,बहुत सारी हमारी हसीन पुरानी यादें ताजा की,मॉरीशस की जब हम हनीमून कपल थे।
रात नौ बजे खाना हो गया,दिन भर रचित सोया नहीं था ,उसे अब नींद आने लगी । वह टीवी देखते देखते सो गया।

में उठी और रचित को  नींद का इंजेक्शन लगा दिया।आज मैं नर्स की भूमिका में थी।
उसके बाद मैने तुरंत राकेश को फोन किया ,राकेश मेरे फोन का ही इंतजार घर के नीचे कर रहा था।वह तुरंत घर आ गया।

फिर उसने भारी चीज उसके सर पर दे मारी।जिससे बहुत खून निकलने लगा और थोड़ी देर में उसकी इहलीला समाप्त हो गई।
हम और रात होने का इंतजार कर रहे थे।
हमारी सोसायटी का वॉचमैन बीच में घर चला जाता था  रात को ,ये बात सोसायटी में किसी को मालूम नहीं थी ,मैने एक बार उसे धमकी दी थी कि मैं उसकी शिकायत सोसायटी के मैनेजमेंट से कर दूंगी ।
वह घिघियाने लगा ,तब मैने कहा _चलो मैं तुम्हारी शिकायत नहीं करूंगी।तब से वह मुझे बहुत सम्मान करता है ।

मैने नीचे से व्हील चेयर लिया और उसपर रचित को बैठा कर दोनों उसे नीचे ले आए।
राकेश ने दरवाजा खोला और रचित को अंदर गाड़ी में डाल हम उसे जंगल की ओर ले गए।हमने सावधानी बरती पहले उसका चेहरा पूरा बिगाड़ दिया ।
फिर पेट्रोल डाल कर बॉडी को जला दिया ,और वापस आ गए।
अब अगली प्रक्रिया पर काम करना था।

संजय सकते में आ गया मतलब रचित का मर्डर हो चुका?
रचित अब इस दुनिया में नहीं है ,इस सुंदर चेहरे के पीछे इतना वीभत्स चेहरा छुपा है।
उसका मन कर रहा था ,इस स्त्री को उठ इतने तमाचे जड़े ।
लेकिन संजय ने अपने गुस्से को काबू किया,और शैव्या की बात सुनने लगा।

फिर क्या हुआ? संजय ने पूछा।

अब दर्द सहने की बारी राकेश की थी,मैने उसे समझा दिया था कि ,उसे इस प्रक्रिया में ज्यादा नहीं सहना पड़ेगा मैं संभाल लूंगी।
कौन सी प्रक्रिया,पहेलियां न बुझाओ,सीधे बात बताओ।

मैने एसिड  राकेश के चेहरे पर डाला ,इसका ख्याल रखा की चेहरा  30% से ज्यादा नहीं जले।
पर तुमने ऐसा क्यों किया? संजय की समझ में अभी भी कुछ नहीं आ रहा था।
इसलिए क्योंकि मैं रचित को जिंदा रखना चाहती थी राकेश के रूप में ।मैने इतने अच्छे से प्लान बनाया था कि , हर छोटी बड़ी बात रचित को राकेश की बताई थी ,उसकी पसंद उसकी नापसंद,उसकी हर आदत को बारीकी से समझाया था ,लेकिन शाकाहारी होने की वजह से राकेश मात खा गया।
अभी कुछ दिनों में वो प्लास्टिक सर्जरी की मदद से रचित का चेहरा ले कर सबके सामने आ जाता ।
लेकिन अफसोस ऐसा हो न सका।
केस सॉल्व कर लिया गया,जहां रचित की बॉडी दफनाई गई थी वहां से शव जली हुई हालत में मिली।
शैव्या और राकेश को गिरफ्तार कर लिया गया 302 का मुकदमा चला ।
सब हैरान थे ,रचित के घर में जवान बेटे की हत्या से उनकी दुनिया उजड़ गई थी।
शैव्या और राकेश को कुछ हासिल नहीं हुआ ,सिवा जेल के।
बहुत से सवाल छोड़ जाते  हैं ये अपराध???
लेकिन अपराधी तो अपराध कर ही जाते हैं।

समाप्त