बचपन  में  माँ  का  वो बात- बात पर डांटना,
हर  दिन पापा का अनुशासन का पाठ पढ़ाना,
झूठ  नही  केवल  सच्चाई के रास्ते पर चलना,
हर  अच्छी  आदत  को अपने जीवन में लाना।

गलती पर कभी प्यार से कभी झिड़क से बताना,
घर    के   छोटे-मोटे  कामों    में    हाथ   बटाना,
हर किसी के दिल में प्यार और अपनापन ढूढ़ना,
कभी जानबूझकर  किसी का दिल मत  दुखाना।

मुस्करा माँ कहती इन सबकी तुम्हे आदत बनाना,
अपने  प्रेम और  विश्वास  से सबका दिल जीतना,
अपने  संस्करों  की  आदत को कभी मत छोड़ना,
क्योंकिअच्छी आदत होती है हर औरत का गहना।

शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश "उरई"