मेरी कलम से तु अपने को खफा ना कर
लिख देती है गुजरे पलों की बात तू गिला ना कर
इश्क़ की आग में जलने वाले जानते हैं
कब तुफां आ जाए ,तू किनारे की बात ना कर
सुरूर था मुझे भी अपने इसी नसीब का कभी
पल भर में जमीन पर ले आया ,तू उडने की बात ना कर
जीने लगी हूँ अब इक अरसे बाद फिर से
तेरी संगत भा गयी ,अब नाराजगी जाहिर ना कर
खुश बहुत हूँ सौबत में तेरी, ज़िन्दादिली सीख ली
मेरी किसी अदा पर अपने को खफा ना कर
कृष्णा की✍️ कलम से

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