कर  कर सोलह श्रृंगार निहारे पथ 
प्रियतम की... 
कब आओगे चंदा सुनो
पुकार ये. मन की.. 
पूजा की थाली सजाई.. 
प्रभु , चरणों में तेरे आई.. 
अमर सुहागन कर दो, 
ये  आशा जीवन की.. 
सात जन्म के बंधन की 
ये डोर न टूटे.. 
सियाराम की जोड़ी
का ये संग न छूटे.. 
करती हूं ये पावन व्रत, 
है धरा गगन की.. 
कर सोलह श्रृंगार
निहारे पथ प्रियतम की... 
कब आओगे चंदा सुनो
पुकार ये मन की..!