अब वे मिलते,फोन पर बातें करते ,भविष्य के सपने देखते।
एक दिन मीरा ने कहा _अमित मेरे लिए मां पिताजी ने रिश्ता देखा है ,शायद फाइनल हो जाए।
लड़का सरकारी नौकरी में है। मेरी फोटो भेजी गई है।
अमित का दिल धक्क् से हो गया,उसने कहा  तुमने विरोध नहीं किया?
मैं क्या कहती , मैंने कहा कि मुझे अभी पढ़ना है अभी मुझे शादी नहीं करनी है तो मां ने  कहा पढ़ाई तो शादी के बाद भी हो सकती है लेकिन अच्छा लड़का बहुत मुश्किल से मिलता है अगर तय हो जाती है तो नवंबर में  मां मेरी शादी कर देंगी।


4 महीने का समय है बताओ अब मैं क्या करूं। 

अमित गहरी सोच में डूब गया बिना भाई की शादी के  उसका तो अभी नंबर भी नहीं था ।उसने  मीरा से कहा मीनू बस 2 साल रुक जाओ किसी तरह ये शादी टाल  दो ।
तुम किसी प्रतियोगिता की तैयारी करना शुरू कर दो तब तक मेरे  भाई की शादी  हो जायेगी और सही होते ही , मैं तुमसे शादी करूंगा ।

,लेकिन मुझे पता है  मेरे पिताजी नहीं रुकेंगे।  मीरा ने कहा।
मीरा और अमित को एक अनजान डर सताने लगा कि शायद उनके बिछड़ने का समय आ गया है।मीरा अमित से लिपट कर रोने लगी,दर्द तो बहुत हो रहा था अमित को भी, लेकिन वो नहीं रो सकता था।

अमित ने अपने घर में अप्रत्यक्ष रूप से प्रेम विवाह के लिए अपने माता पिता का दिल टटोलना शुरू किया ,लेकिन वहां तो ऐसा लगा कि ऐसा किया तो भूचाल आ जाएगा। दुनिया उलट पलट जाएगी ,लड़की के रूप में कोई दूसरे ग्रह का प्राणी आ जाएगा।
वो चुप हो गया,भाई को समझ में आ गया था कि अमित परेशान है।उसने उससे पूछा क्या हुआ_ अमित ने कहा ,लगता है मैं अपनी आंखों के सामने अपने प्यार को खो दूंगा,वो किसी और के घर की शोभा बनेगी।

पर कारण क्या है,भाई ने पूछा।
अमित झल्ला गया_तू ही तो कारण है?
मैं _भाई ने आश्चर्य से पूछा।
हां भाई तू,तेरी शादी जब तक नहीं होगी ,तब तक मेरी कैसे होगी।
पर भाई मेरी हो भी गई तो क्या गारंटी की तेरी शादी उससे हो जाएगी ,अपने और उसके घर वाले मानेंगे!!!
अमित हताश हो गया।
इधर मीरा परेशान थी। उसने मां से कहा की उसे और पढ़ना है ,प्रतियोगिता की तैयारी करनी है।
मां ने समझाना शुरू किया ,अरे बिटिया अभी तो हमने रिश्ता देखना शुरू किया है,बहुत सारी अड़चने आती हैं शादी तय करने तक ,जरूरी थोड़े है कि तुरंत ही तय हो जाए।

मीरा चुप हो गई। इसी बीच अमित का ट्रांसफर चंडीगढ़ हो गया।
दोनों उदास थे ,क्या होगा?
कैसे रहेंगे एक दूसरे को देखे बिना ।
मीरा ने वादा लिया ,तुम हर सप्ताह पत्र लिखोगे।

अमित ने हामी भरी,उसने भी कहा कि _मीनू तुम मेरा इंतजार करना ।
तुम जैसा कहोगी ,वैसा ही करूंगा।अगर तुम्हारी शादी तय होने वाली होगी ,तो तुम मुझे बता देना , मैं तुमसे सारे विरोध के बाद मंदिर में शादी कर लूंगा।
मीरा चुप थी ,एक मजबूत शाख से लिपटी थी वो लता की तरह ,ऐसा लग रहा था कि उस लता को किसी ने बेरहमी के साथ उस शाख से अलग कर दिया।

अमित चला गया।हर सप्ताह उसका पत्र नंदा के घर आता था,वह पढ़ती खूब रोती ,विरह में दोनों ही जी रहे थे।
अमित को चंडीगढ़  में कंपनी की तरफ से घर भी मिल गया था।
वह वहां की खूबसूरती के बारे में बताता ,और दोनों कल्पना करते कि वे वहां साथ घूम रहे हैं।
कभी कभी फोन भी आता।
मीरा के घरवालों को भनक लग चुकी थी कि कोई तो  है , मीरा की जिंदगी में।

मां ने इशारों इशारों में अपना इरादा बता दिया था कि ,शादी उन सबकी मर्जी से ही होगी।
कहीं लड़की कोई कदम न उठा ले,मसलन भाग न जाए,या बगावत कर दे,इसलिए मां ने पिता को शादी में थोड़ी तेजी करने को कहा।

लड़के वाले मीरा को प्रत्यक्ष देख कर तसल्ली करना चाहते थे ,इसलिए पूजा के  बहाने मां , मीरा को  मंदिर ले गई ,लड़का और उसके परिवार वालों को मीरा भा गई ,और उन्होंने नवरात्रि में सगाई करने को कहा।
मीरा को इस बात की भनक तक लगने नहीं दिया गया।

नवरात्र आने में 15 दिन बचे थे।एक दिन नंदा ने मीरा को  बताया कि ,तुम्हें लड़के वालों ने पसंद कर लिया है।
मीरा _क्या बकवास कर रही हो,कब ?कैसे?
नंदा ने धीरे से कहा _मेरी मां तो तुम्हारी मां बता रही थी कि तुम्हें मंदिर लड़के को दिखाने के लिए  ले जाया  गया था।
ऐसा क्यों किया मां ने_मीरा बहुत गुस्से में थी।
उसने मां से सवाल किया , मां तुमने मुझसे बिना पूछे ही हामी भर दी ,यहां तक की मुझे बताया भी नहीं कि तुम मुझे दिखाने ले जा रही हो।
आज मां ने कठोरता से जवाब दिया , जिसकी उसे उम्मीद नहीं थी।
मां ने कहा ,ये मत सोचना की मुझे कुछ पता नहीं चलता ,या मैं एक लड़की की मां होते हुए ,आंख बंद कर बैठी हूं।मेरी आंखें और कान हमेशा खुले रहे।
मुझे भनक लग गई है , कि तुम अमित को चाहती हो,मैने ये बात तुम्हारे पिता को नहीं बताई ,बल्कि उनसे जल्दी से जल्दी तुम्हारे लिए शादी देखने को कहा था।
तुम्हें पता है कि पिता जी को ये पता चलता तो वे क्या कर देते।इस लिए भलाई इसी में है कि तुम उसको भूल जाओ।

मीरा सन्न रह गई ,उसे तो काटो तो खून ही नहीं रहा।
चुपचाप से कमरे में चली गई।डरपोक तो थी ही,लेकिन जब तक अमित साथ था उसे लगता कि वो घर ,परिवार ,समाज सबका मुकाबला कर सकती थी ,लेकिन आज उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी।
फाइनल ईयर की परीक्षा होने वाली थी,इसलिए एग्जामिनेशन लीव था।दोपहर को मां सो गई तो मीरा ने अमित को फोन मिलाया ।
उधर से अमित की आवाज आई,_हैलो।
हैलो अमित कैसे हो ,मीरा ने औपचारिकता वश पूछा ।
ठीक हूं,बताओ कुछ खास बात !
हां मेरी शादी तय हो गई ,नवरात्र में सगाई हो जाएगी_सुबकते हुए मीरा ने कहा।
मीतू,मीतू तुम रोना नहीं ,मैं आकर सब ठीक कर दूंगा।

मैं तीन दिन बाद आता हूं।
मीरा की सांस में सांस आई।
तीन दिन के बाद अमित आ गया, गुप चुप तरीके से उन्होंने मंदिर में शादी की तैयारी शुरू कर दी।

क्रमशः