अभी तक आपने पढ़ा कि वो लड़की सिस्टर मारिया के आश्रम पहुंच जाती है और सिस्टर मारिया के गले लगकर बहुत रोती है। उसके बारे में सिस्टर मार्था ने सिस्टर मारिया को काफी कुछ बता दिया था। वो किसी और के अपराध के वजह से आज अपनी जिंदगी के बचे खुचे दिन उस आश्रम में पूरा करने आई थी।

गतांक से आगे

सिस्टर मारिया उस लड़की को अपने साथ अपने कमरे में ले जाती हैं, एक ग्लास पानी देती हैं जिसे वो गटागट पी जाती है,ऐसा लग रहा था मानो वो जन्मों की प्यासी है। पानी पीने के बाद उसने राहत की सांस ली और कुर्सी से अपना सिर टिका कर आंखे मूंद ली मानो वो अपने अतीत से पीछा छुड़ाना चाहती हो, पर कहीं ऐसा भी होता है? 

"बेटी, तुम अब आराम से इस आश्रम में रहो , यह अब तुम्हारा घर है मुझे आज के बाद तुम अपनी मदर समझो।तुम्हें कभी भी कोई भी प्रॉब्लम हो तो तुम मुझसे शेयर करना। प्रभु तुम्हारी हमेशा हेल्प करेगा।"
सिस्टर मारिया ने उसके सिर पर हाथ फेरा।

"मदर ! ये नाम तो हमारी जिंदगी से तब निकल गया था जब हमने इस धरती पर अपना पहला कदम रखा था और हमारी मां साहब  ने अपना आखिरी कदम इस दुनिया से निकाला था।आपने हमें मदर कहने का हक दिया है । हमें आपके रूप में हमारी मां मिल गई। लेकिन हम आपको मदर नहीं कहेंगे मां साहेब कहेंगे  क्योंकि हमारे खानदान में मां को मां साहेब कहा जाता है , हमें अपनी मां साहेब को तो कभी पुकारने का अवसर ही नहीं मिला लेकिन अब आज से आप ही हमारी मां साहेब हैं"। उसकी आंखों से मोटे मोटे मोती गिरने लगे।

"बेटी, ठीक है तुम मुझे मां साहेब कहो मुझे अच्छा लगेगा लेकिन एक बात कहती हूं ,ये प्रभु का घर है तुम उसकी शरण में हो , अपने आंसू पोंछ डालो, अब कभी नहीं रोना । वरना तुम्हारी इस मां साहेब  को बहुत दुख होगा।"सिस्टर मारिया ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा।

"ठीक है मां साहेब , आज के बाद ये आंसू कभी नहीं बहेंगे। हम आपकी बात याद रखेंगे। "उसके चेहरे पर दृढ़ता आ गई।

"वेरी गुड, तुम बहुत प्यारी हो। लेकिन इस प्यारी सी लड़की का नाम क्या है ये तो उसने अभी तक बताया ही नहीं।"
सिस्टर मारिया ने धीरे से मुस्कुरा कर कहा।

"संयोगिता ....  संयोगिता राजपूत, यही नाम रखा था हमारे पिता महाराज ने हमारा । हमारी मां साहब तो हमें छोड़कर  उसी वक्त चली गई थी  पिता महाराज अब  हमें अकेला छोड़कर चले गए। अब कोई हमें इस नाम से नहीं पुकारता। सब हमें हिकारत की दृष्टि से देखते हैं। संयोगिता की जगह हमें ए लड़की, के नाम से पुकारते हैं।"उसका चेहरा बुझ गया।

"ये तो बहुत ही प्यारा नाम है ,संयोगिता राजपूत। लेकिन एक बात बताओ , तुम अपने आपको हम क्यों कहती हो , तुम तो एक ही हो ना बेटी।" सिस्टर मारिया ने आश्चर्य से पूछा।

"मां साहेब, हम राजपूत खानदान से हैं, जहां अपने आपको भी सम्मान देने की प्रथा है इसलिए हम ख़ुद को भी गर्व के साथ संबोधित करते हैं।और  मैं के स्थान पर हम का प्रयोग करते हैं।" संयोगिता के चेहरे पर पहली बार अपने खानदान की प्रतिष्ठा को याद करके गर्व भरी मुस्कान आ गई।

"अच्छा तो यह बात है, ठाकुर खानदान के इतिहास के बारे में हमने भी बहुत कुछ सुना है। उनकी बहादुरी और बलिदान की कहानियां पूरे वर्ल्ड में फेमस है।"सिस्टर मारिया ने खुशी से कहा।

संयोगिता की गर्दन गर्व से तन गई।और इतने दुख में भी वो अपने खानदान के इतिहास के प्रति नतमस्तक हो गई थी।

संयोगिता बहुत थक गई थी , उसने  सिस्टर से रिक्वेस्ट की कि वो थोड़ी देर सोना चाहती है क्योंकि कई दिनों से वो सो नहीं पाई है, सिस्टर मारिया ने उसे अपने कमरे में भेज दिया ताकि बिना शोरगुल के वो आराम से सो सके। उन्हें पता था कि वो कितनी परेशान है लेकिन फिर भी खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है।

सिस्टर  उसे चुपचाप अपने कमरे में छोड़कर बाहर निकल आईं और, बरामदे में आकर आरामकुर्सी में बैठ गईं और सिस्टर मार्था से बात करने लगी।

"सिस्टर मार्था, वो यहां पहुंच गई है , आप परेशान मत हों, मैं उसका पूरा ध्यान रखूंगी। "

"थैंक यू सो मच सिस्टर मारिया, आपने मेरी बात मान ली और उस लड़की को अपने आश्रम में आश्रय दे दिया मैं इसके लिए आपकी अहसान मंद हूं मैं गॉड से प्रे करूंगी कि वो आपको हमेशा खुश रखें। बहुत ही दुखी है वो,प्रभु ने उसकी इतनी परीक्षा ली है कि वो अब हार मान रही है।" सिस्टर मार्था ने कहा। उनकी आवाज कंपकपा रही थी। खुशी की अतिरेक से आंसू बह रहे थे उन्हें अब अहसास हो गया कि वो एकदम सही जगह पहुंच गई है ।

"सिस्टर , एक बात कहें, उसे देखकर ऐसा लगता है कि वो अपनी जिंदगी के दुखों तकलीफों को जीत चुकी है । अब तो वो केवल समय के साथ आंख मिचौली खेलती रहती है।आप तो उसे बचपन से जानती हैं । जितना आपने मुझे उसके बारे में बताया है उससे मैं थोड़ा बहुत तो जान पाई हूं लेकिन उसे देखकर ऐसा लगता है कि अभी मैं उसकी जिंदगी का आधा रहस्य भी नहीं जान सकी।" सिस्टर मारिया खोए खोए से लहजे में बोली, उनके आश्रम में आज के पहले भी बहुत सी दुखियारी स्त्रियां आई हैं, लेकिन जो लगाव इससे महसूर्स हो रहा था, वो किसी और लड़की के महसूस नहीं होता था।

"सिस्टर मारिया, आप प्लीज उसे अकेला मत रहने दीजिए, उसे हंसाइए, मुस्कुराने की वजह दीजिए। ये दोनों चीजें उसकी जिंदगी में बरसों से नहीं आई हैं। कम से कम इस जिंदगी को छोड़ते समय ही वो थोड़ा सा हंस ले।" सिस्टर मार्था ने सिस्टर मारिया से रिक्वेस्ट की।

" मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं उसके साथ ऐसा  क्या करूं। जिससे वो अपनी जिंदगी के बाकी दिन खुशी खुशी बिता सके। वो बहुत ही प्यारी बच्ची है सिस्टर, उसे देखकर मुझे अपनी बेटी मिशेल की याद आ रही है वो भी इतनी ही प्यारी सी थी। लेकिन ....। चलिए छोड़िए । आप कैसी हैं ये बताइए।"सिस्टर मारिया ने अचानक बात बदल दी। मानो कोई पुरानी याद उनके ह्रदय को कचोटने लगी हो और वो उनसे पीछा छुड़ाना चाहती हों।

क्रमशः
लेखिका
संगीता शर्मा "प्रिया"