अदृश्य साया जो मेरे साथ रहता है
जब मे जीवन की श्यामल निशा से घबराऊ
तो मेरा संबल बनाकर मुझे संभाल लेता है
कौन है वो 
अदृश्य साया 
जब मै तन्हाई मे अपनी ही परछाई से डरती हूँ
डर से ललाट से पसीना टपकता है
हाँ हाँ वहाँ से हिलने की हिम्मत भी नहीं होती 
तब वो अदृश्य साया कहता है
पास मे मै तेरे बैठा हूँ फिर तू किस बात से डरता है

कौन है वो 
जो मुझ मे आत्मविश्वास जगाता है
बीच भँवर मे फँसी नैया को किनारा दिखाता है
जो मुश्किलों मे हिम्मत से काम लेने के लिए प्रेरित करता है 
एकबार उसका नाम स्मरण करते ही 
हर मुश्किल आसान हो जाता है
कौन है वो 
जो उसे पाषाण कहता है 
जरूर वो नास्तिक ही होगा 
जो ईश्वर की महिमा से अंजान है
अरे वो तो जग का रचयिता है 
हर बिगड़े काम को अपनी जादुई छड़ी से सँवारता है
हाँ हाँ वो मेरा चित्तचोर कान्हा है 
जो मै राह भटकू तो हाथ पकड़कर मेरा
सही राह दिखाता है


शिल्पा मोदी✍️✍️