लो खुद को एक बार फिर से निहार तुम 
लो खुद को आज फिर से निखार तुम ,
उलझा रखा है दिवाली की सफाईयों में खुद को इस कदर जरा दिलों से भी दो थोड़े जाले उतार तुम।
रखा खुदा ने सोच समझ कर 
दशहरे दिवाली के बीच करवा चौथ को ,
जरा हटाकर गंदगी खुद को लो आज संवार तुम।
उलझ कर रह जाती है दुनिया केवल घर बच्चों में क्यों,
 जरा हमसफर को भी लो दिल सेआज पुकार तुम।
रहे सलामत सबके घर ,रहे सदा सुहागन सब
 करवा चौथ का आज मनाओ खुशियों से त्यौहार तुम।


स्वरचित सीमा कौशल यमुनानगर हरियाणा