इस जग की रचना की उसने वह है सबसे शक्तिमान।
हमसब जिसका वंदन करते कहते हैं उसको भगवान।।
सृष्टि का निर्माण किया व जीवन का अस्तित्व बनाया।
खनिज संपदा से पूर्ण इस वसुधा को हम सबने पाया।।
उसने ही इस धरती पर रंगों का अद्वितीय संसार बनाया।
भिन्न-भिन्न जीवो को रचकर पृथ्वी का उपवन सजाया।।
उसका ही आशीष पाकर सब जीवों में हुए बडे विद्वान।
हमसब जिसका वंदन करते कहते हैं उसको भगवान।।
हर एक मौकों पर आकर मानव जाति को समझाया।
कहीं बंधा वह मर्यादा में कहीं गीता का पाठ पढ़ाया।।
कहीं तो शांतिदूत बना वह कहीं क्रोध की सीमा लांगी।
कहीं कहीं सर्वस्व दिया तो कहीं तीन पग भूमि मांगी।।
कोई ना उसको जान सका वह तो सर्व गुणों की खान।
हम सब जिसका वंदन करते कहते हैं उसको भगवान।।
बल दिया मानव को उसने प्रतिभाओं से संपन्न बनाया।
जिस पर उसने छाया करदी उसने ही परचम लहराया।।
अगम, अगोचर, निराकार है महिमा उसकी सबसे न्यारी।
जहां पर उसकी दृष्टि पड़ती मुस्काती है हर एक क्यारी।।
शकल धरा पर कोई नहीं है करता जो उसका अपमान।
हम सब जिसका वंदन करते कहते हैं उसको भगवान।।
नाम - विक्रांत राजपूत चम्बली

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